वहीं जनसंख्या नियंत्रण पर उन्होंने कहा कि सरकार अगर दो या तीन बच्चों की सीमा तय करती है तो इसका पालन न करने वालों पर गंभीरता से विचार करना होगा, लेकिन इसके साथ ही जातीय और सामाजिक संतुलन का भी ध्यान रखना जरूरी है, ताकि किसी वर्ग का अस्तित्व ही समाप्त न हो जाए।
भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “अग्निवीर की जो मंशा है, जैसे मैंने रूस और कई अन्य देशों में देखा है कि जब बच्चा इंटर तक पहुंचता है, तो उसके परिवार और स्कूल को एक नोटिस आता है।
सरकार उन्हें 3 या 4 साल के लिए सेना की पूरी ट्रेनिंग देती है। उसके बाद वे बच्चे लौट आते हैं, जिसको मेडिकल की पढ़ाई करनी हो, वह मेडिकल की पढ़ाई करे। जिसको इंजीनियरिंग की पढ़ाई करनी हो, वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करे। कोई विशेष सुविधा नहीं दी जाती, लेकिन हर व्यक्ति के लिए तीन या चार साल की सैन्य ट्रेनिंग कई देशों में है।”
उन्होंने कहा कि शायद हमारे प्रधानमंत्री या जिन लोगों ने इस कानून को मिलकर बनाया, उनके मन में कहीं न कहीं यह भाव रहा होगा कि इस देश के लोग स्वस्थ हों और देश का प्रत्येक व्यक्ति सैनिक के रूप में अपने आपको तैयार करे। इसके लिए तीन साल या दो साल की ट्रेनिंग आवश्यक है। यह भावना जरूर रही होगी।
भाजपा नेता ने कहा कि जब इसमें यह जोड़ दिया गया कि इन्हें नौकरी दी जाएगी, तो उसी कारण थोड़ा अंतर्विरोध बढ़ा। आज सेना की आवश्यकता, युद्ध की आवश्यकता और नौजवानों की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने जो दो साल का कार्यकाल बढ़ाया है, उसका मैं स्वागत करता हूं। यह बहुत स्वागतयोग्य कदम है। इससे बच्चे और बड़ी संख्या में अग्निवीर की तैयारी करेंगे, स्वस्थ होंगे और धीरे-धीरे हमारा देश भी स्वस्थ होगा।
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि देश का एक वर्ग है जो समझदार है, चाहे वो किसी भी जाति या व्यवसाय का हो। वो जनसंख्या नियंत्रण का पूरा पालन करता है। इसी देश के अंदर कुछ लोग ऐसे हैं, जो जनसंख्या नियंत्रण का अनुसरण नहीं कर रहे हैं।
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अब सरकार अगर दो बच्चों या तीन बच्चों की सीमा निर्धारित करती है, तो उस सीमा को पार करने वालों पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा, क्योंकि यहां सवाल केवल जनसंख्या नियंत्रण का नहीं है। इसमें हमें सामाजिक और जातिगत संतुलन का भी ध्यान रखना होगा, क्योंकि जाति को हम इस देश में नकार नहीं सकते।
उन्होंने कहा कि इस बात का भी ध्यान रखना पड़ेगा कि ऐसा न हो कि कुछ लोगों का वजूद ही मिट जाए, क्योंकि जब पार्टियां किसी को टिकट देती हैं तो यह नहीं देखतीं कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून का पालन किया है या नहीं।
