बढ़ती महंगाई और खराब सरकारी सेवाओं के खिलाफ फ्रांस में चल रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शनिवार को बहुत हिंसक हो गए। देश भर में हुए दंगों के दौरान सरकारी इमारतों, टाउन हॉल और कमर्शियल दुकानों को निशाना बनाया गया और बड़े पैमाने पर आगजनी और तोड़फोड़ की गई।
इस हिंसक झड़प में देश भर में करीब 1,800 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है और 500 पुलिसवाले घायल हुए हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी की हार्ट अटैक से मौत हो गई, जबकि अकेले राजधानी पेरिस में 855 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
पिछले एक महीने से फ्रांस में खराब स्कूलों, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और टीचरों की कमी की मांगों को लेकर स्टूडेंट विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, शनिवार को लाखों आम नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। स्टूडेंट्स द्वारा उठाए गए बुनियादी मुद्दों के साथ-साथ देश में बढ़ती महंगाई और खराब सरकारी सेवाओं के खिलाफ नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। हालांकि विरोध प्रदर्शन ज़्यादातर शांतिपूर्ण थे, लेकिन कुछ एंटी-सोशल और हिंसक ग्रुप्स ने सीधे सरकारी प्रॉपर्टी, दुकानों और पुलिस गाड़ियों पर हमला किया।
हिंसा ने ऐतिहासिक इमारतों को भारी नुकसान पहुंचाया है। लिमोज शहर में 19वीं सदी के मशहूर ‘सिटी हॉल’ को प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी, जिससे वह जलकर खाक हो गया। पेरिस, मार्सिले, ल्योन, बोर्डो, रेनेस, स्ट्रासबर्ग, ग्रेनोबल, नीस और लिमोज जैसे बड़े शहरों में सैकड़ों दुकानों को लूटा गया और उनमें तोड़फोड़ की गई। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन ले कॉर्नौइल ने सीधे तौर पर इस तबाही के पीछे लेफ्ट ग्रुप्स का हाथ होने का आरोप लगाया है।
फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने देश भर में बढ़ती हिंसा पर गहरा गुस्सा जताया है। ‘फ्रांस में ऐसी हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रेसिडेंट मैक्रों ने चेतावनी दी है, “जिन लोगों ने पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाया है, व्यापारियों की दुकानें लूटी हैं और सिटी काउंसिल पर हमला किया है, उन्हें ढूंढकर कड़ी सज़ा दी जाएगी।”
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