10 साल की मेहनत रंग लाई, भारत का स्वदेशी इंजन का सपना सफलता के करीब

HAL का बड़ा ब्रेकथ्रू, स्वदेशी टर्बोफैन इंजन ने 99.5% स्पीड टेस्ट किया पास

भारत डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत ने अपनी रक्षा के लिए कई हथियार बनाए हैं। लेकिन फाइटर जेट इंजन इस समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन इस बीच एक और अच्छी खबर है। भले ही भारत खुद फाइटर जेट इंजन नहीं बना पाया हो, लेकिन टर्बोफैन इंजन के मामले में भारत ने अच्छी तरक्की की है। भारत अपना स्वदेशी टर्बोफैन इंजन बना रहा है। यह कोई आम इंजन नहीं है। यह इंजन बड़े एयरक्राफ्ट में लगाया जाता है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने यह इंजन बनाया है। इस टर्बोफैन इंजन को एक समय फेलियर के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने 10 साल की कड़ी मेहनत के बाद टर्बोफैन इंजन बनाने में कामयाबी हासिल की है। इस टर्बोफैन इंजन का भारत का मिशन क्या है? आइए समझते हैं।

HAL ने स्वदेशी HTFE-25 इंजन के सबसे ज़रूरी हिस्से का कड़ा टेस्ट किया है। यह 99.5 परसेंट की मैक्सिमम स्पीड तक सफलतापूर्वक पहुंचा। एक दशक की लंबी लड़ाई और फेलियर के टैग के बाद HAL को यह कामयाबी मिली है। भारत का स्वदेशी इंजन का सपना अब पूरा होने की कगार पर है। टर्बोफैन इंजन-25 एक देसी एयरक्राफ्ट इंजन है। इस इंजन को 25 किलोन्यूटन का थ्रस्ट पैदा करने के लिए डेवलप किया गया है। यह प्रोजेक्ट 2013 में बेंगलुरु में HAL एयरो इंजन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में शुरू किया गया था।

इस इंजन का इस्तेमाल किन एयरक्राफ्ट में किया जाएगा?

यह एक लो-बाईपास, ट्विन-स्पूल टर्बोफैन इंजन है। इस इंजन को बेसिक मिलिट्री ट्रेनर एयरक्राफ्ट, एडवांस्ड ट्रेनर एयरक्राफ्ट, छोटे बिजनेस जेट, ड्रोन और भविष्य के देसी अनमैन्ड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को ध्यान में रखकर डेवलप किया गया है। HAL के मुताबिक, सिंगल इंजन कॉन्फ़िगरेशन 5 टन तक के एयरक्राफ्ट को पावर दे सकता है। ट्विन इंजन कॉन्फ़िगरेशन 9 टन तक के एयरक्राफ्ट के लिए काम आ सकता है। इस टर्बोफैन इंजन का इस्तेमाल HJT-36 और CATS जैसे प्लेटफॉर्म में किया जा सकता है।

इससे इंजन डेवलपमेंट में तेज़ी आई है

इस चुनौती का सामना करने के लिए, HAL ने दिसंबर 2023 में लगभग 10000 स्क्वायर मीटर के एरिया में एक नई डिज़ाइन और टेस्टिंग फैसिलिटी शुरू की। नई फैसिलिटी ने टेस्टिंग कैपेसिटी बढ़ा दी है। इससे इंजन डेवलपमेंट में तेज़ी आई है। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि HAL ने इसके लिए मुख्य रूप से अपने इंटरनल कॉर्पोरेट फंड का इस्तेमाल किया है। यानी यह प्रोजेक्ट फंडिंग के लिए एयर फोर्स और मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस पर निर्भर नहीं था। इससे टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट में पूरी आज़ादी मिली।

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