‘हैंड्स ऑफ ग्रीनलैंड’: ट्रंप की आक्रामक नीति के खिलाफ हजारों लोग उतरेंगे सड़कों पर

‘हैंड्स ऑफ ग्रीनलैंड’: ट्रंप की आक्रामक नीति के खिलाफ हजारों लोग उतरेंगे सड़कों पर

'Hands off Greenland': Thousands take to the streets to protest Trump's aggressive policy

डेनमार्क और ग्रीनलैंड में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कब्जे की मांग का व्यापक विरोध शुरू हो गया है। शनिवार (17 जनवरी)को अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन की तैयारी है। विरोध प्रदर्शन की टाइमिंग बेहद अहम है क्योंकि इसी दौरान अमेरिकी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल कोपेनहेगन में डेनिश और ग्रीनलैंड के अधिकारियों से मुलाकात करेगा।

अपनी योजना का खुलासा करते हुए डेनमार्क में ग्रीनलैंड के लोगों के एक संगठन, ‘उआगुट’ ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, “ग्रीनलैंड के लोकतंत्र और मौलिक मानवाधिकारों के लिए सम्मान का एक साफ और एकजुट संदेश पहुंचाना हमारा मकसद है।” सोशल मीडिया के जरिए ‘हैंड्स ऑफ ग्रीनलैंड’ विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद जताई जा रही है। डेनिश मीडिया हाउस ‘द लोकल डीके’ ने इसकी जानकारी दी।

ग्रीनलैंड में ट्रंप के विशेष दूत जेफ लैंड्री ने शुक्रवार (16 जनवरी)को कहा था कि प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान वाशिंगटन द्वारा द्वीप पर कब्जा करने का सौदा होना चाहिए और होगा और राष्ट्रपति इस काफी हद तक स्वायत्त क्षेत्र को हासिल करने के बारे में गंभीर हैं, जो डेनिश साम्राज्य का हिस्सा है।

ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर अपनी मंशा जाहिर करते रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को एक बार फिर अपने फैसले से इत्तेफाक न रखने वालों के खिलाफ टैरिफ की धमकी दी। व्हाइट हाउस में ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड के मामले में वो टैरिफ लगाने से नहीं चूकेंगे; अगर कोई देश अमेरिका की योजना का साथ नहीं देता है तो उस पर टैरिफ लगाकर आर्थिक दबाव बढ़ाया जाएगा। ट्रंप ने दोहराया कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है और इसे लेकर वो कड़े फैसले लेकर ही रहेंगे।

हफ्ते की शुरुआत में नाटो के कई सहयोगी फ्रांस, जर्मनी, यूके, नॉर्वे और स्वीडन ने आर्कटिक द्वीप पर सेना तैनात की, जिसके बारे में डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने कहा कि ग्रीनलैंड की रक्षा पूरे नाटो के लिए एक “आम चिंता” का विषय है।

56 से 57 हजार की आबादी वाला ग्रीनलैंड 1979 से स्वशासन का अधिकार रखता है। इस देश की रक्षा और विदेश नीति पर डेनमार्क का नियंत्रण है। खुद ग्रीनलैंड में भी डेनमार्क से पूरी तरह अलग होने की मांग उठती रही है, लेकिन अमेरिका का हिस्सा बनने के विचार को वहां के लोगों ने सिरे से खारिज किया है। ग्रीनलैंड के नागरिकों का मानना है कि अमेरिकी नियंत्रण से उनकी पहचान खत्म हो सकती है।

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