नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में दुनिया भर के शीर्ष राजनीतिक नेताओं और नीति-निर्माताओं का तांता लगा है। इस उच्चस्तरीय सम्मेलन का उद्देश्य जिम्मेदार, समावेशी और नवाचार-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विकास की दिशा तय करना है, साथ ही भारत को वैश्विक एआई गवर्नेंस के केंद्र में स्थापित करना है।
स्वीडन की उपप्रधानमंत्री, ऊर्जा, व्यवसाय और उद्योग मंत्री एब्बा बुश बुधवार (18 फरवरी)को नई दिल्ली पहुंचीं। विदेश मंत्रालय ने उनके आगमन का स्वागत करते हुए कहा कि यह यात्रा भारत-स्वीडन साझेदारी को उभरती प्रौद्योगिकियों, विशेषकर AI, के क्षेत्र में और मजबूत करेगी। मंत्रालय ने दोनों देशों के बीच व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, नवाचार, जलवायु कार्रवाई और शिक्षा में सहयोग का उल्लेख किया।
फिनिश राजनेता पेटेरी ओर्पो भी समिट में भाग लेने भारत पहुंचे। उनका स्वागत कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत सिंह ने किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह यात्रा डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सतत विकास और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत-फिनलैंड सहयोग को और गहरा करेगी।
स्पेन के राष्ट्रपति पेद्रो सांचेज़ भी एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने नई दिल्ली पहुंचे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि उनकी यात्रा भारत-स्पेन ‘डुअल ईयर ऑफ कल्चर, टूरिज्म एंड एआई’ को नई गति देगी। उनका स्वागत भी राज्य मंत्री जयंत सिंह ने किया।
इससे पहले सर्बिया, श्रीलंका, गुयाना और बोलीविया के नेता भी समिट में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मानुएल मेक्रों इन दिनों भारत यात्रा पर हैं, उनके भी सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है।
भारत में आयोजित यह संस्करण पूर्व आयोजित वैश्विक AI सम्मेलनों की कड़ी को आगे बढ़ाता है। पहला वैश्विक एआई समिट 2023 में यूनाइटेड किंगडम में हुआ था, जहां एआई सुरक्षा और संभावित जोखिमों पर चर्चा केंद्रित रही। इसके बाद 2025 में फ्रांस में आयोजित समिट में बड़े निवेश और नियामकीय ढांचे पर जोर दिया गया था।
भारत में हो रहा 2026 का यह सम्मेलन AI आकांक्षाओं को ठोस परिणामों में बदलने पर केंद्रित है। समिट का उद्देश्य ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ के लिए AI के व्यावहारिक उपयोग को प्रदर्शित करना और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना है। आगामी दिनों में उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकें, नीति-चर्चाएं और मुख्य भाषण आयोजित किए जाएंगे, जिनसे वैश्विक एआई गवर्नेंस और सहयोगी नवाचार ढांचे को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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