भारत–इज़राइल के बीच भी होगा मुक्त व्यापार समझौता (FTA); वार्ता में तेजी

फरवरी में आएगा प्रतिनिधिमंडल, 2026 के अंत तक समझौते करने पर लक्ष्य

भारत–इज़राइल के बीच भी होगा मुक्त व्यापार समझौता (FTA); वार्ता में तेजी

India and Israel to also sign a Free Trade Agreement (FTA); negotiations gaining momentum

भारत और इज़राइल के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर बातचीत ने रफ्तार पकड़ ली है। इज़राइल का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल फरवरी के अंत में नई दिल्ली आने वाला है, जिसके साथ ही औपचारिक वार्ताएँ फिर से शुरू होंगी। भारत में इज़राइल के राजदूत रेउवेन अज़ार ने कहा कि दोनों देश इस प्रक्रिया को व्यावहारिक और चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हैं, ताकि ठोस नतीजे समयबद्ध ढंग से सामने आ सकें।

समझौते के लिए टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस (ToR) नवंबर 2025 में औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किए गए थे। यह प्रक्रिया उस समय पूरी हुई जब केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इज़राइल के दौरे पर थे। ToR पर सहमति के बाद अब संरचित और विषयगत बातचीत का रास्ता साफ हो गया है।

राजदूत अज़ार के अनुसार, बातचीत को दो चरणों में आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है। पहले चरण में उन मुद्दों को सुलझाने पर ध्यान होगा, जिन्हें ‘लो-हैंगिंग फ्रूट’ कहा जा रहा है, यानी ऐसे विषय जिन पर अपेक्षाकृत जल्दी सहमति बन सकती है। इसके बाद दूसरे चरण में अधिक जटिल और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। दोनों पक्षों का लक्ष्य 2026 के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते (FTA)को अंतिम रूप देना है।

अज़ार ने भारत की हालिया व्यापारिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और कहा कि यूरोपीय संघ, यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए समझौतों ने वैश्विक व्यापार वार्ताओं में नई दिल्ली की क्षमता को साबित किया है। उन्होंने भरोसा जताया कि यही अनुभव भारत–इज़राइल FTA को भी गति देगा।

क्षेत्रीय हालात पर बात करते हुए राजदूत ने गाज़ा में तनाव, उग्रवाद-निरोध और 20-सूत्रीय योजना के कार्यान्वयन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कूटनीति के सफल होने की उम्मीद जताई और कहा कि मिस्र के शर्म-अल-शेख शिखर सम्मेलन में हमास द्वारा किए गए विमुद्रीकरण संबंधी वादों का पालन होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत, इज़राइल और अरब देश दोनों के लिए व्यापक अवसर प्रदान करता है, जिससे मध्य-पूर्व में स्थिरता को बल मिल सकता है।

अज़ार ने हाल ही में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बैठक का भी हवाला दिया। इस बातचीत में ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर चिंताएँ प्रमुख रहीं।

इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित इज़राइल यात्रा को लेकर भी अटकलें तेज़ हैं, हालांकि अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। दोनों देशों की पेशेवर टीमें रक्षा उद्योग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा, कृषि, परिवहन और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने के लिए समन्वय कर रही हैं। कुल मिलाकर, भारत–इज़राइल FTA वार्ता और संभावित उच्चस्तरीय दौरे दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने वाले कदम माने जा रहे हैं।

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