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Tuesday, February 17, 2026
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भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता: यूरोपीय कारों पर टैरिफ 110% से घटकर 40%

ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव संभव

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अंतिम चरण में पहुंच गया है और इसके तहत भारत यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती करने जा रहा है। प्रस्तावित समझौते के तहत कुछ यात्री कारों पर आयात शुल्क मौजूदा 110 प्रतिशत से घटाकर तुरंत 40 प्रतिशत किया जाएगा, जिससे भारत का अत्यधिक संरक्षित ऑटोमोबाइल बाजार अब तक का सबसे बड़ा खुलापन देख सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह कम टैरिफ उन कारों पर लागू होगा जिनकी आयात कीमत 15,000 यूरो (लगभग 17,700 डॉलर) से अधिक होगी। समय के साथ इन शुल्कों को और घटाकर लगभग 10 प्रतिशत तक लाने की योजना है, जिससे Volkswagen, Mercedes-Benz और BMW जैसी यूरोपीय कंपनियों को दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कार बाजार तक कहीं बेहतर पहुंच मिल सकेगी।

भारत और EU के बीच व्यापार वार्ता के औपचारिक समापन की घोषणा मंगलवार को होने की संभावना है, जिसे अधिकारियों ने “मदर ऑफ आल डील्स” करार दिया है। यह समझौता वर्षों की रुक-रुक कर चली बातचीत के बाद एक बड़ा ब्रेकथ्रू माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के लिए यह कदम एक बड़ी नीतिगत रियायत माना जा रहा है, क्योंकि भारत लंबे समय से घरेलू ऑटो सेक्टर को ऊंचे आयात शुल्कों के जरिए संरक्षण देता रहा है। वर्तमान में भारत पूरी तरह आयातित कारों पर 70 से 110 प्रतिशत तक शुल्क लगाता है,जिनमें Tesla के सीईओ एलन मस्क भी शामिल हैं, द्वारा आलोचना की जाती रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत शुरुआती चरण में लगभग 2 लाख इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) कारों पर 40 प्रतिशत शुल्क लागू करेगा, हालांकि कोटा और समयसीमा में अंतिम घोषणा से पहले बदलाव संभव है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को पहले पांच वर्षों के लिए इस कटौती से बाहर रखा जाएगा ताकि Tata Motors और Mahindra & Mahindra जैसी भारतीय कंपनियों के घरेलू निवेश की रक्षा की जा सके। इसके बाद EV पर भी चरणबद्ध शुल्क कटौती की संभावना है।

कम आयात शुल्क से Volkswagen, Renault, Stellantis, Mercedes-Benz और BMW जैसी यूरोपीय कंपनियों को बड़ा लाभ मिल सकता है। फिलहाल ये कंपनियां भारत में स्थानीय असेंबली करती हैं, लेकिन ऊंचे टैरिफ के कारण प्रीमियम मॉडल आयात करना मुश्किल रहा है। नई नीति से कंपनियां अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कारें ला सकेंगी और बाजार की मांग का परीक्षण कर सकेंगी।

यूरोपीय ब्रांड वर्तमान में भारत की लगभग 4.4 मिलियन वार्षिक कार बिक्री में 4 प्रतिशत से भी कम हिस्सेदारी रखते हैं। बाजार पर Maruti Suzuki, Tata Motors और Mahindra का प्रभुत्व है, जो मिलकर करीब दो-तिहाई बिक्री नियंत्रित करते हैं। हालांकि, 2030 तक भारत का कार बाजार 6 मिलियन यूनिट वार्षिक तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे प्रतिस्पर्धा का स्वरूप बदल सकता है और नए निवेश के अवसर खुल सकते हैं।

यह व्यापार समझौता सिर्फ ऑटो सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, इससे द्विपक्षीय व्यापार में बड़ा विस्तार हो सकता है और भारत के श्रम-प्रधान निर्यात जैसे वस्त्र, परिधान और आभूषण को बढ़ावा मिल सकता है। अमेरिका द्वारा हालिया टैरिफ लगाए जाने के बाद भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ा है, ऐसे में EU के साथ व्यापक समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह भारत की व्यापार और औद्योगिक नीति में दशकों का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत-EU साझेदारी को नई दिशा देगा।

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