भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को एक बड़ा अवसर मिला है। दोनों देशों ने अत्याधुनिक हैमर (HAMMER) स्मार्ट प्रिसिजन-गाइडेड एयर-टू-ग्राउंड हथियार प्रणाली को भारत में संयुक्त रूप से विकसित और निर्मित करने का फैसला किया है। यह पहल भारतीय वायुसेना और नौसेना की मारक क्षमता बढ़ाएगी, ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा निर्माण के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
यह समझौता राज्य-स्वामित्व वाली भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और फ्रांस की सफ्रान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस (SED) के बीच जॉइंट वेंचर कोऑपरेशन एग्रीमेंट (JVCA) के तहत हुआ है। दोनों कंपनियां 50:50 हिस्सेदारी वाले एक निजी जॉइंट वेंचर का गठन करेंगी, जो हैमर सिस्टम के निर्माण, आपूर्ति और मेंटेनेंस को भारत में ही स्थानीय स्तर पर संचालित करेगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह JV भारतीय वायुसेना और नौसेना की ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने पर केंद्रित रहेगा।
इस घोषणा का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि भारत ने 2020 में गलवान तनाव के दौरान चीन के साथ गतिरोध के बीच हैमर हथियार प्रणाली को आपातकालीन खरीद मार्ग से हासिल किया था। इसके बाद मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकवादी ढांचों पर सटीक हमलों के लिए हैमर म्यूनिशन का व्यापक उपयोग किया था। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी जैमिंग-प्रूफ क्षमता, फायर-एंड-फोरगेट तकनीक और कम ऊंचाई से भी फायर करने की क्षमता ने वायुसेना को गहरी मारक क्षमता प्रदान की।
हैमर प्रणाली फ्रांस की सफ्रान द्वारा विकसित एक उन्नत एयर-टू-सरफेस हथियार है, जो साधारण बमों को GPS, INS और इंफ्रारेड/लेज़र-गाइडेड किट्स के माध्यम से प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन में बदल देती है। यह 125 किलो से लेकर 1,000 किलो तक के विभिन्न वॉरहेड विकल्पों के साथ आती है और वैरिएंट के आधार पर लगभग 70 किलोमीटर तक की रेंज प्रदान करती है। इसे अफगानिस्तान, माली, लीबिया और सीरिया समेत कई अंतरराष्ट्रीय अभियानों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है, और NATO देशों में इसकी व्यापक तैनाती है।
नई साझेदारी के तहत भारत में धीरे-धीरे 60 प्रतिशत तक स्थानीयकरण बढ़ाया जाएगा। प्रमुख सब-असेंबली, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल पार्ट्स देश में ही बनाए जाएंगे, जबकि BEL अंतिम असेंबली, टेस्टिंग और क्वालिटी एश्योरेंस की जिम्मेदारी संभालेगा। उत्पादन हस्तांतरण चरणबद्ध तरीके से होगा।
यह सौदा भारत–फ्रांस रक्षा साझेदारी की एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है। इस वर्ष भारत ने 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमानों के लिए 63,000 करोड़ रुपये का समझौता किया, जबकि स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के संयुक्त निर्माण और स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए उन्नत जेट इंजन विकसित करने पर दोनों देशों के बीच सहयोग की दिशा भी तय हो चुकी है। हैमर प्रणाली का भारत में संयुक्त निर्माण न केवल आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन का मार्ग मजबूत करेगा, बल्कि भारतीय सेनाओं की प्रहार क्षमता को भी नए स्तर तक ले जाएगा, यह ‘मेक इन इंडिया’ के लिए एक और बड़ी सफलता है।
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