भारत का मिलिट्री टेक्नोलॉजी सेक्टर तेज़ी से मजबूती की ओर बढ़ रहा है। ट्रैक्सन द्वारा जारी ‘इंडिया मिलिट्री टेक रिपोर्ट 2025’ के मुताबिक, बीते एक दशक में इस सेक्टर की वार्षिक फंडिंग में 61 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि 2016 से अब तक इस क्षेत्र में 211 फंडिंग राउंड के जरिए कुल 611 मिलियन डॉलर जुटाए जा चुके हैं।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 2025 में अकेले अब तक 192.4 मिलियन डॉलर की फंडिंग आ चुकी है, जो किसी भी साल की सबसे बड़ी रकम है। इसमें शुरुआती चरण की कंपनियों ने विशेष बढ़त बनाई है। इस साल का सबसे बड़ा सौदा राफे एमफिब्र का 100 मिलियन डॉलर का सीरीज-बी राउंड रहा। इसके बाद न्यूस्पेस रिसर्च (33 मिलियन डॉलर) और सागर डिफेंस इंजीनियरिंग (25.4 मिलियन डॉलर) के सौदे शामिल हैं। वहीं, अंतिम चरण की फंडिंग में भी तेजी देखी गई। बिग बैंग बूम सॉल्यूशंस ने सीरीज-सी में 29.9 मिलियन डॉलर, जबकि टोनबो इमेजिंग ने सीरीज-डी में 20.4 मिलियन डॉलर जुटाए।
वर्तमान में भारत में 150 से अधिक मिलिट्री टेक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जिनमें से 76 कंपनियों को अब तक इक्विटी फंडिंग मिल चुकी है। दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु इसके मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं, जहां स्टार्टअप्स ने क्रमशः 194.6 मिलियन डॉलर और 166.1 मिलियन डॉलर की राशि जुटाई है।
ट्रैक्सन की सह-संस्थापक नेहा सिंह ने कहा, “भारत का डिफेंस टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम इनोवेशन, नीति समर्थन और निवेशक भागीदारी से प्रेरित होकर एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है।” रिपोर्ट में बताया गया कि आत्मनिर्भर भारत अभियान, आईडीईएक्स (इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस) और रक्षा औद्योगिक गलियारे जैसी पहलें इस क्षेत्र को नई गति दे रही हैं।
इस सेक्टर में अब तक 110 से अधिक वेंचर कैपिटल फर्में निवेश कर चुकी हैं, जबकि चार कंपनियां सार्वजनिक (IPO) के जरिए बाजार में प्रवेश कर चुकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह संकेत है कि भारतीय मिलिट्री टेक सेक्टर अब परिपक्वता और समेकन की दिशा में बढ़ रहा है। साफ है कि आने वाले वर्षों में भारत का मिलिट्री टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम वैश्विक स्तर पर न सिर्फ प्रतिस्पर्धा करेगा बल्कि घरेलू रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती देगा।
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