ईरान की नौसेना के युद्धपोत IRINS लावन के अतिरिक्त क्रू सदस्यों को भारत ने उनके देश वापस भेज दिया है। ईरान ने तकनीकी खराबी के कारण इस जहाज को कोच्ची में डॉक करने की अनुमति मांगी थी, जिसे भारत ने मानवीय आधार पर मंजूरी दे दी थी। अब ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच इस जहाज के अनावश्यक क्रू सदस्यों को वापस भेजने का निर्णय लिया गया है। जहाज के कुल 183 क्रू सदस्यों में से 50 से अधिक अभी भी भारत में ही मौजूद हैं, क्योंकि यह युद्धपोत फिलहाल कोच्चि में ही खड़ा है।
IRINS लावन के अतिरिक्त नाविक तुर्की एयरलाइन की उड़ान से भारत से रवाना हुए। इस विमान में कोलोंबो से लाए गए 80 से अधिक ईरानी नाविकों के शव भी थे। यह विमान शुक्रवार (13 मार्च) देर रात कोच्चि पहुंचा था। ये मृत नाविक 4 मार्च को श्रीलंका के तट के पास एक अन्य ईरानी युद्धपोत में सवार थे, जिसे कथित तौर पर एक अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबो दिया था।
तकनीकी समस्या उत्पन्न होने के बाद 4 मार्च से IRINS लावन कोच्चि में ही तैनात है। ईरान की ओर से किए गए अनुरोध के बाद 1 मार्च को जहाज को आपातकालीन डॉकिंग की अनुमति दी गई थी। जानकारी के अनुसार, IRINS लावन के ईरानी नाविक Yerevan के रास्ते सड़क मार्ग से ईरान लौटेंगे।
इधर, होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर तैनात दो दर्जन से अधिक भारतीय ध्वज वाले व्यापारी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए नई दिल्ली लगातार प्रयास कर रही है। इसी बीच गुरुवार रात भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सय्यद अब्बास अराघाची से बातचीत की। पश्चिम एशिया में संकट शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत थी।
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