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IRINS देना के डूबने से पहले भारत ने दूसरे ईरानी जहाज को दिया था आश्रय

IRINS लावन कोच्चि में सुरक्षित डॉक

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श्रीलंका के पास हिंद महासागर में बुधवार (4 मार्च)को एक ईरानी जहाज को अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से उड़ा कर डुबो दिया था। वहीं, हिंद महासागर में अमेरिका के हमले का निशाना बनने से पहले ही श्रीलंका सरकार ने एक  ईरानी जहाज को आश्रय दिया था। इसी बीच अब यह जानकारी सामने आई है कि अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी फ्रिगेट को डुबोए जाने से कुछ दिन पहले, तकनीकी समस्या आने के बाद ईरान ने कोच्चि में दूसरे नौसैनिक जहाज की आपातकालीन डॉकिंग के लिए भारत से संपर्क किया था।

28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए, उसी दिन तेहरान ने IRINS लावन को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति मांगी थी। जहाज में तकनीकी खराबी आ गई थी और उस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता थी। यह जहाज अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू के लिए इस क्षेत्र में मौजूद था। इसके बाद 1 मार्च को इस अनुरोध को मंजूरी दे दी गई और IRINS लावन 4 मार्च को कोच्चि पहुंच गया। इस जहाज के 183 कर्मचारियों को फिलहाल दक्षिण के इस बंदरगाह शहर की नौसैनिक सुविधाओं में रखा गया है।

IRINS लावन को समय रहते सुरक्षित बंदरगाह मिल गया, लेकिन विशाखापत्तनम में सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद ईरान लौट रहा IRINS देना जहाज 4 मार्च को अमेरिकी पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो के हमले के बाद हिंद महासागर में डूब गया। इस हमले से ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते संघर्ष में तनाव और बढ़ गया।

यह घटना दक्षिण श्रीलंका के गाले बंदरगाह से करीब 40 नॉटिकल मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। युद्धपोत ने तड़के विस्फोट की सूचना देते हुए आपातकालीन संदेश भेजा था, लेकिन श्रीलंका के बचाव जहाज मौके पर पहुंचने से पहले ही वह डूब चुका था। जहाज के डूबने से 80 से अधिक नाविकों की मौत हो गई।

भारत में यह आलोचना हो रही थी कि मेहमान के तौर पर आए ईरानी जहाज को पर्याप्त मदद नहीं दी गई। इस बीच भारतीय नौसेना ने IRINS देना के डूबने वाले दिन की घटनाओं पर स्पष्टीकरण दिया। गुरुवार (5 मार्च)को जारी बयान में नौसेना ने बताया कि फ्रिगेट से संकट संकेत मिलने के बाद तुरंत खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया। श्रीलंका के अधिकारियों द्वारा पहले से चलाए जा रहे खोज अभियान को तेज करने के लिए एक लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान तैनात किया गया, जबकि हवा से छोड़े जा सकने वाले लाइफ राफ्ट से लैस एक अन्य विमान को स्टैंडबाय पर रखा गया।

उस समय क्षेत्र में मौजूद INS तरंगिनी को भी बचाव अभियान में सहायता के लिए मोड़ दिया गया। इसके अलावा INS इक्षक जहाज कोच्चि से रवाना किया गया, जो लापता कर्मियों की तलाश में सहायता के लिए इस क्षेत्र में तैनात है। नौसेना के अनुसार, यह कदम मानवीय आधार पर उठाया गया है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रिगेट के डूबने की घटना की निंदा की थी। उन्होंने इसे “समुद्र में क्रूरता” करार दिया। उनका कहना था कि करीब 130 नाविकों को लेकर जा रहे इस जहाज को ईरान के तट से लगभग 2000 मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी पूर्व चेतावनी के उड़ा दिया गया। वहीं, अमेरिका के रक्षा सचिव हेगसेथ ने हमले की पुष्टि करते हुए इसे टॉरपीडो से दी गई “शांत मौत” बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला अमेरिका-इज़राइल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद जारी संघर्ष में सैन्य अभियानों का एक महत्वपूर्ण विस्तार है।

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