पाकिस्तानी जेल में भारतीय मछुआरे की मौत; अन्य बंदी भारतीय मछुआरों के रिहाई की मांग बढ़ी

पाकिस्तानी जेल में भारतीय मछुआरे की मौत; अन्य बंदी भारतीय मछुआरों के रिहाई की मांग बढ़ी

Indian fisherman dies in Pakistani jail; demands for the release of other detained Indian fishermen intensify.

पाकिस्तान की कराची स्थित मलिर जेल में एक भारतीय मछुआरे की 16 जनवरी 2026 को मौत हो गई, जबकि वह अपनी सजा पूरी कर चुका था और उसकी भारतीय नागरिकता की आधिकारिक पुष्टि भी हो चुकी थी। इस घटना ने पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय मछुआरों की लंबी हिरासत, स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति और देर से होने वाली स्वदेश वापसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शांति कार्यकर्ता और पत्रकार जतिन देसाई के अनुसार, मृतक मछुआरे की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। वह मलिर जेल में बंद था, जहां भारतीय मछुआरों की मौत के मामले बार-बार सामने आते रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि हर साल औसतन तीन से चार भारतीय मछुआरों की पाकिस्तान की हिरासत में मौत होती है, जिनमें से अधिकांश की मृत्यु मलिर जेल में ही होती है।

इस मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि संबंधित मछुआरे ने वर्ष 2022 में ही अपनी सजा पूरी कर ली थी और उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि भी हो चुकी थी। इसके बावजूद वह वर्षों तक जेल में बंद रहा। भारत और पाकिस्तान के बीच 2008 में हुए द्विपक्षीय कांसुलर एक्सेस समझौते की धारा 5 के तहत, किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता की पुष्टि और सजा पूरी होने के एक महीने के भीतर उसकी रिहाई और स्वदेश वापसी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

जतिन देसाई ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, “ हालांकि यह एग्रीमेंट कागज़ पर तो है, लेकिन इसे लागू करने में बहुत ज़्यादा कमियां हैं।” और आगे कहा, “मरे हुए मछुआरे ने, जेल में बंद कई दूसरे लोगों की तरह, अपनी सज़ा बहुत पहले ही पूरी कर ली थी और उसे तुरंत वापस भेजा जा सकता था।”

मछुआरे की मौत के बाद पाकिस्तान की जेलों में बंद अन्य भारतीय मछुआरों के परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। कई मछुआरे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन उन्हें समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। लंबे समय से रिहाई की उम्मीद लगाए बैठे इन परिवारों में निराशा और हताशा गहराती जा रही है।

वर्तमान में कराची की जेलों में 198 भारतीय मछुआरे बंद हैं, जिनमें से 19 महाराष्ट्र से हैं। यह आंकड़ा इस बात को रेखांकित करता है कि समस्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि व्यापक और संरचनात्मक है।

भारत और पाकिस्तान दोनों के मछुआरे अक्सर अरब सागर में अनजाने में समुद्री सीमा पार कर लेते हैं। समुद्र में सीमा रेखा स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं है और पारंपरिक मछली पकड़ने वाली नौकाओं में आधुनिक नेविगेशन उपकरणों का अभाव रहता है। ऐसे में गिरफ्तारी की घटनाएं आम हो जाती हैं, लेकिन सजा पूरी होने के बाद भी वर्षों तक हिरासत में रखा जाना मानवीय दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।

मानवाधिकार संगठनों और शांति कार्यकर्ताओं ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों से इस मुद्दे को मानवीय आधार पर सुलझाने की अपील की है। उनका कहना है कि जिन मछुआरों ने अपनी सजा पूरी कर ली है और जिनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि हो चुकी है, उनकी तत्काल रिहाई और स्वदेश वापसी सुनिश्चित की जानी चाहिए। देसाई ने कहा, “इन मछुआरों को लगातार हिरासत में रखने का कोई मकसद नहीं है, बल्कि इससे उनके परिवारों की तकलीफें और बढ़ेंगी।”

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