खबर लिखे जाने तक (करीब 9.35 बजे) 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 106 अंकों यानी 0.13 प्रतिशत की तेजी के साथ 82,382.07 पर कारोबार कर रहा था, तो वहीं एनएसई निफ्टी 89.30 (0.11 प्रतिशत) अंकों की बढ़त के साथ 82,365.37 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था।
आईटी शेयरों में आई गिरावट के बाद नए सिरे से खरीदारी के रुझान के बीच घरेलू बाजार में शुरुआती कारोबार में तेजी देखने को मिली, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई। लेकिन कुछ समय बाद बाजार ने फिर से मजबूती दिखाई।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.55 प्रतिशत की तेजी, तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.24 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। जबकि बीएसई आईटी इंडेक्स में 1.4 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली।
सेक्टरवार देखें, तो निफ्टी आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा 1.34 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी बैंक में 0.32 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो में 0.26 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.20 प्रतिशत, तो निफ्टी मेटल में 0.15 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में आईटी शेयरों ने सबसे अधिक बढ़त दर्ज की, जिसमें टेक महिंद्रा, इंफोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टीसीएस के शेयरों में 1 से 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा, सन फार्मा, एलएंडटी, मारुति सुजुकी, टाइटन, बीईएल और अदाणी पोर्ट्स शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। जबकि, एनटीपीसी, पावरग्रिड, एक्सिस बैंक, एचयूएल, अल्ट्राटेक सीमेंट और इटरनल टॉप लूजर्स वाले शेयरों की श्रेणी में शामिल रहे।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, निफ्टी 25,250 से 25,650 के दायरे में कंसोलिडेट कर रहा है, यानी फिलहाल बाजार सीमित दायरे में घूम रहा है। 25,250 का स्तर तत्काल सपोर्ट के रूप में महत्वपूर्ण है और इसके ऊपर टिके रहना बाजार की रिकवरी के लिए जरूरी है। वहीं ऊपर की ओर 25,650 का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों की बात करें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख हाल के सत्रों में मिला-जुला रहा है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार मजबूती दिखा रहे हैं और ताजा उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने 5,119 करोड़ रुपए से ज्यादा की शुद्ध खरीदारी की है।
एक एक्सपर्ट के मुताबिक, रेजिस्टेंस के पास जारी कंसोलिडेशन और बीच-बीच में हो रही मुनाफावसूली को देखते हुए सतर्क और स्टॉक-विशिष्ट रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा। जोखिम प्रबंधन के साथ सोच-समझकर निवेश करना ही फिलहाल सही रणनीति मानी जाएगी।
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