भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ पर पहुंचा, एक साल में 62% की जबरदस्त बढ़त

पांच वर्षों में लगभग तीन गुना वृद्धि

भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ पर पहुंचा, एक साल में 62% की जबरदस्त बढ़त

India's defence exports reach ₹38,424 crore, a massive 62% increase in one year

भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात को रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया है।  पीआईबी के जारी आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 23,622 करोड़ रुपये के मुकाबले 14,802 करोड़ रुपये यानी 62.66 प्रतिशत की बड़ी छलांग है।

इस उपलब्धि के पीछे सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों का अहम योगदान रहा है। इस निर्यात में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (DPSU) का हिस्सा 54.84 प्रतिशत रहा, जबकि निजी क्षेत्र ने 45.16 प्रतिशत योगदान दिया। वास्तविक आंकड़ों में देखें तो DPSU का योगदान 21,071 करोड़ रुपये और निजी कंपनियों का योगदान 17,353 करोड़ रुपये रहा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर रक्षा उत्पादन विभाग, निर्यातकों और सभी हितधारकों की सराहना की। उन्होंने कहा, “ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायी नेतृत्व में, भारत रक्षा निर्यात में एक शानदार सफलता की कहानी लिख रहा है! भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट FY 2025-26 में रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ के साथ अब तक के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर के मुकाबले 62.66% की मज़बूत ग्रोथ दिखाता है। डिफेंस एक्सपोर्ट में ₹14,802 करोड़ की यह बड़ी बढ़ोतरी भारत की स्वदेशी क्षमताओं और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग ताकत पर बढ़ते ग्लोबल भरोसे को दिखाती है। DPSUs के 54.84% और प्राइवेट इंडस्ट्री के 45.16% योगदान के साथ, यह माइलस्टोन एक मिलकर काम करने वाले और आत्मनिर्भर डिफेंस इकोसिस्टम की ताकत को दिखाता है।”

DPSU में 151% की उछाल, निजी क्षेत्र भी मजबूत

रिपोर्ट के अनुसार, DPSU के निर्यात में पिछले वर्ष के मुकाबले 151 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, निजी क्षेत्र ने भी 14 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। पिछले वित्त वर्ष में DPSU का निर्यात 8,389 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 21,071 करोड़ रुपये हो गया है। इसी तरह निजी क्षेत्र का आंकड़ा 15,233 करोड़ से बढ़कर 17,353 करोड़ रुपये पहुंच गया।

रक्षा निर्यात का यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में लगभग तीन गुना वृद्धि को दर्शाता है। यह इस बात का संकेत है कि भारत में बने रक्षा उत्पादों को वैश्विक स्तर पर तेजी से स्वीकार किया जा रहा है।

80 से अधिक देशों को निर्यात

भारत अब 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए सरकार के प्रयासों ने निर्यात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सुव्यवस्थित ऑनलाइन मंजूरी प्रणाली और सरल प्रक्रियाओं ने कंपनियों के लिए निर्यात अनुमोदन प्राप्त करना आसान बना दिया है। परिणामस्वरूप, पिछले एक वर्ष में रक्षा निर्यातकों की संख्या 128 से बढ़कर 145 हो गई है।

इनमें सबसे अधिक मांग वाली प्रणालियों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल शामिल है, जिसने 300 किलोमीटर तक की सटीक मारक क्षमता के कारण फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों का ध्यान आकर्षित किया है।

सरकार द्वारा व्यापार सुगमता बढ़ाने और रक्षा निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए किए गए प्रयासों का भी इस वृद्धि में बड़ा योगदान माना जा रहा है। रक्षा उत्पादन विभाग ने नए ऑनलाइन पोर्टल और सरल मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के जरिए निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाया है।

 

यह भी पढ़ें:

क्या सुबह उठकर पी लेते हैं बहुत सारा पानी? यह आदत कर सकती है बीमार!

पीट हेगसेथ ने अमेरिकी आर्मी चीफ रैंडी जॉर्ज से तत्काल मांगा इस्तीफा

पाकिस्तान में डीजल 55% और पेट्रोल 42% महंगा, आम जनता पर बड़ा बोझ

Exit mobile version