ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जताई है, लेकिन साफ कर दिया है कि यह तभी संभव है जब वॉशिंगटन प्रतिबंधों में राहत देने को तैयार हो। क्षेत्रीय तनाव और सैन्य धमकियों के बीच जिनेवा में प्रस्तावित वार्ता को संभावित कूटनीतिक समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।
बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने कहा कि समझौते के लिए पहल अब अमेरिका को करनी है। उन्होंने कहा, “अगर वे ईमानदार हैं, तो मुझे यकीन है कि हम एक समझौते की राह पर होंगे।” और जोड़ा कि यदि प्रतिबंधों में राहत पर बातचीत होती है तो तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाओं पर चर्चा के लिए तैयार है।
अमेरिका की ओर से हाल के दिनों में यह आरोप लगाया गया है कि ईरान वार्ता में प्रगति को टाल रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समझौता चाहते हैं, लेकिन इसे अमल में लाना बहुत कठिन है। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने के लिए समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई संभव है।
ईरान ने 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडार को कम करने की पेशकश को लचीलेपन का संकेत बताया है। हालांकि, उसने स्पष्ट किया है कि शून्य संवर्धन स्वीकार्य नहीं है। तख्त-रवांची ने कहा कि पूर्ण रूप से संवर्धन रोकना परमाणु अप्रसार संधि के तहत ईरान के अधिकारों का उल्लंघन होगा। 2015 के परमाणु समझौते के तहत ईरान ने अपने कम संवर्धित यूरेनियम का बड़ा हिस्सा रूस को भेजा था। एक बार फिर मॉस्को ने सामग्री लेने की पेशकश की है, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय वार्ता के दौरान ही होगा।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम किसी भी समझौते का हिस्सा नहीं होगा, भले ही इस पर अमेरिका और इज़राइल की ओर से दबाव हो। तख्त-रवांची ने कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और युद्ध की आशंका से हालात और जटिल हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में क्षेत्र के अमेरिकी सैन्य ठिकाने वैध लक्ष्य माने जा सकते हैं।
ओमान की मध्यस्थता में फरवरी में अप्रत्यक्ष वार्ता हो चुकी है और अब जिनेवा में दूसरे दौर की बातचीत प्रस्तावित है। क्षेत्रीय देशों, विशेषकर कतर, ने भी तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किए हैं।
हालांकि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है, लेकिन जिनेवा वार्ता को संभावित प्रगति के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। तख्त-रवांची ने कहा कि ईरान सकारात्मक भावना के साथ वार्ता में जाएगा, लेकिन अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या अमेरिका प्रतिबंधों में ठोस राहत देने के लिए तैयार होता है।
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