मध्य पूर्व में जारी युद्ध के तीसरे सप्ताह में ईरान ने एक बड़ा सैन्य कदम उठाते हुए पहली बार अपनी रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल सेज्जिल मिसाइल का इस्तेमाल किया है। ईरान और इज़राइल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमले तेज कर रहे हैं। युद्ध के 17वें दिन सोमवार (16 मार्च) तड़के एक ड्रोन ने दुबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के पास स्थित ईंधन टैंक को निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। आपातकालीन सेवाओं ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
इससे एक दिन पहले, रविवार (15 मार्च) को ईरान ने अपने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ की 54वीं लहर के तहत इज़राइल पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार की। ईरानी अधिकारियों के अनुसार इस हमले में पहली बार सेज्जिल रणनीतिक मिसाइल का परिचालन उपयोग किया गया। इन हमलों का लक्ष्य इज़राइल के प्रशासनिक और सैन्य फैसलों से जुड़े केंद्रों तथा रक्षा अवसंरचना को बताया गया।
सेज्जिल को आशूरा मिसाइल के नाम से भी जाना जाता है। यह दो चरणों वाली ठोस ईंधन से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे पूरी तरह ईरान में डिजाइन और विकसित किया गया है, हालांकि कुछ रिपोर्टों में इसके विकास में चीनी तकनीकी सहयोग की बात भी कही गई है।
करीब 18 मीटर लंबी और 1.25 मीटर चौड़ी इस मिसाइल का कुल वजन लगभग 23,600 किलोग्राम है। यह लगभग 700 किलोग्राम का वारहेड ले जा सकती है और पारंपरिक विस्फोटकों के साथ-साथ परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम मानी जाती है। इसकी अधिकतम मारक क्षमता लगभग 2,000 किलोमीटर बताई जाती है। ईरान का दावा है कि यदि इसे मध्य ईरान से दागा जाए तो यह लगभग सात मिनट में तेल अवीव तक पहुंच सकती है। ठोस ईंधन होने के कारण इसे तरल ईंधन वाली मिसाइलों की तुलना में बहुत तेजी से लॉन्च किया जा सकता है।
क्यों कहा जाता है ‘डांसिंग मिसाइल’:
सेज्जिल मिसाइल की सबसे खतरनाक विशेषता इसकी उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता है। यह उड़ान के विभिन्न चरणों में पैंतरेबाज़ी कर सकती है, जिससे इसे रोकना पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से इसे “डांसिंग मिसाइल” यानी ‘नाचने वाली मिसाइल’ कहा जाता है।
बताया जाता है कि इसके उन्नत संस्करण सेज्जिल-2 मिसाइल पर एंटी-रडार कोटिंग भी मौजूद है, जिससे सामान्य रडार सिस्टम के लिए इसे पकड़ना और भी कठिन हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ईरान ने इसका विकास 1990 के दशक के अंत में शुरू किया था और पहला परीक्षण 2008 में किया गया था।
इज़राइल और खाड़ी देशों पर हमले:
ईरान की इस मिसाइल के साथ कई अन्य मिसाइलें भी दागी गईं, जिनमें खोर्रमशहर मिसाइल, खेबर शेकान मिसाइल, कद्र मिसाइल और इमाद मिसाइल शामिल हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने दावा किया कि इन हमलों का निशाना इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र के कई सैन्य ठिकाने थे।
रिपोर्टों के अनुसार मिसाइल हमलों से अल-हरीर एयर बेस, अली अल-सलेम एयर बेस और कैंप आरिफजान जैसे ठिकानों के आसपास भारी नुकसान और अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई। वहीं इज़राइल में एक मिसाइल हमले से अमेरिकी दूतावास से जुड़े एक अधिकारी के आवास को भी नुकसान पहुंचा। इज़राइली आपातकालीन सेवाओं के मुताबिक दक्षिणी तेल अवीव में हुए हमले में कम से कम तीन लोग घायल हुए, जबकि देश के मध्य हिस्सों में मिसाइल के मलबे गिरने से एक और व्यक्ति घायल हुआ।
ईरान और इज़राइल के बीच जारी इस युद्ध में अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत होने की खबर है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह फिलहाल ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, “ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन मैं अभी इसे स्वीकार नहीं करना चाहता क्योंकि शर्तें अभी पर्याप्त अच्छी नहीं हैं।”
दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघाची ने स्पष्ट कर दिया है कि युद्धविराम की कोई संभावना नहीं है। उनका कहना है कि यह युद्ध अमेरिका और इज़राइल ने शुरू किया है और ईरान अपने लोगों की रक्षा के लिए चाहे जितना समय लगे लड़ाई जारी रखेगा।
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