ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को लेकर हताहतों की संख्या पर विरोधाभास सामने आया है। विपक्ष से जुड़े समाचार मंच ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि देशभर में हुई कार्रवाई के दौरान कम से कम 12,000 लोगों को मारा गया है, जबकि ईरान की इस्लामी रिजीम ने इन आंकड़ों को सिरे से खारिज करते हुए करीब 2,000 मौतों की बात कही है और हिंसा के लिए “आतंकवादियों” को जिम्मेदार ठहराया है।
ईरान इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में इस कार्रवाई को आधुनिक ईरान के इतिहास की सबसे घातक दमन कार्रवाई बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान शीर्ष नेतृत्व की जानकारी और मंजूरी से चलाया गया। इसमें दावा किया गया कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रत्यक्ष आदेशों के तहत कार्रवाई की गई और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने सुरक्षा बलों को लाइव फायरिंग की अनुमति दी। रिपोर्ट यह भी कहती है कि इस दौरान देश में संपूर्ण संचार ब्लैकआउट लागू किया गया, ताकि जानकारी बाहर न जा सके।
इसके उलट, रॉयटर्स से बात करते हुए इस्लामी रिजीम के अधिकारी ने कहा कि हिंसा में मरने वालों की संख्या लगभग 2,000 है और इसके लिए “आतंकवादी तत्वों” को जिम्मेदार है। सरकारी पक्ष का कहना है कि प्रदर्शन हिंसक हो गए थे और सुरक्षा बलों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की।
इस बीच, मंगलवार (13 जनवरी) को चार दिन के पूर्ण संचार ब्लैकआउट के बाद ईरानी नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कॉल करने की सुविधा फिर से मिली। इंटरनेट और टेलीकॉम सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने पहले ही चिंता जताई थी, उनका कहना है कि संचार बंद करना दमन की कार्रवाइयों को छिपाने का एक तरीका होता है।
घटनाक्रम के बीच अंतरराष्ट्रीय दबाव भी तेज होता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यह कदम ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में एक और सख्त संकेत माना जा रहा है।
भारत ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि ईरान से भारत का आयात 0.44 अरब डॉलर रहा। इस तरह दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर का रहा। अमेरिकी टैरिफ घोषणा और ईरान में अस्थिरता का असर भारत–ईरान व्यापार पर पड़ सकता है, खासकर भुगतान, शिपिंग और बीमा से जुड़े मामलों में।
फिलहाल, ईरान में मौतों की वास्तविक संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक ओर विपक्षी मंच के दावे हैं, तो दूसरी ओर सरकार का आधिकारिक बयान। स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच के बिना इन आंकड़ों की पुष्टि संभव नहीं हो सकी है। लेकिन इतना तय है कि ईरान इस समय गंभीर राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दबाव के दौर से गुजर रहा है, जिसके प्रभाव क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर महसूस किए जा सकते हैं।
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