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Monday, January 5, 2026
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ट्रंप की धमकी के बीच ईरान ने खटखटाया संयुक्त राष्ट्र का दरवाज़ा

देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज़

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ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनियों के बीच तेहरान ने संयुक्त राष्ट्र से औपचारिक हस्तक्षेप की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के अध्यक्ष को पत्र लिखकर अमेरिका की ओर से दी जा रही गैरकानूनी धमकियों की कड़ी निंदा करने की अपील की है।

अल जज़ीरा के अनुसार, यह पत्र शुक्रवार को भेजा गया, ठीक उसके कुछ घंटों बाद जब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान और प्रदर्शनकारियों की हत्या होती है तो अमेरिका लॉक्ड एंड लोडेड एंड रेडी टू गो है। ईरान में यह प्रदर्शन मुख्य रूप से बढ़ती महंगाई, आर्थिक ठहराव और जीवन-यापन की लागत में तेज़ बढ़ोतरी के खिलाफ हो रहे हैं।

अपने पत्र में इरावानी ने यूएन महासचिव और सुरक्षा परिषद के सदस्यों से ट्रंप के बयानों की स्पष्ट और दृढ़ता से निंदा  करने का आग्रह किया। उन्होंने इन बयानों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया। इरावानी ने लिखा, “आंतरिक अशांति को भड़काने, प्रोत्साहित करने या बाहरी दबाव या सैन्य हस्तक्षेप के बहाने के रूप में वैध ठहराने का कोई भी प्रयास ईरान के इस्लामिक गणराज्य की संप्रभुता, राजनीतिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का घोर उल्लंघन है।” यह पत्र ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए द्वारा पूर्ण रूप से प्रकाशित किया गया।

पत्र में यह भी कहा गया कि ईरानी सरकार अपनी संप्रभुता की रक्षा के अंतर्निहित अधिकार को दोहराती है और वह  निर्णायक और अनुपातिक तरीके से अपने अधिकारों का प्रयोग करेगी। इरावानी ने चेतावनी दी, “इन अवैध धमकियों और किसी भी संभावित तनाव वृद्धि से उत्पन्न होने वाले सभी परिणामों की पूरी जिम्मेदारी संयुक्त राज्य अमेरिका की होगी।”

इस बीच, IRNA के अनुसार शुक्रवार को भी ईरान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन जारी रहे। क़ोम, मरवदश्त, यासूज, मशहद और हमदान के अलावा तेहरान के तेहरानपार्स और ख़ाक़ सेफ़ीद इलाकों में लोग सड़कों पर उतरे। राजधानी तेहरान में रविवार को दुकानदारों द्वारा महंगाई और आर्थिक जड़ता के खिलाफ हड़ताल किए जाने के बाद से आंदोलन ने तेज़ रफ्तार पकड़ ली है।

अब तक कम से कम सात लोगों की मौत और 44 लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है।

दौरान ट्रुथ सोशल पर अपने पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिंसक तरीके से मारता है, जो उनकी परंपरा है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उन्हें बचाने आएगा। इसके जवाब में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप “पूरे क्षेत्र में अराजकता और अमेरिकी हितों के विनाश के बराबर होगा।”

ईरान इस समय अभूतपूर्व आर्थिक संकट से जूझ रहा है। मुद्रा के तेज़ अवमूल्यन, ऊंची महंगाई और लंबे समय से पड़े सूखे ने हालात और बिगाड़ दिए हैं, खासकर लगभग एक करोड़ की आबादी वाले तेहरान में। इस संकट के बीच राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाते हुए स्वीकार किया है कि मौजूदा हालात के लिए सरकार “कसूरवार” है और समाधान निकालने का वादा किया है।

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