पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद मंगलवार (11 नवंबर) दोपहर 12:30 बजे एक भीषण आत्मघाती विस्फोट से दहल उठी। धमाका रोज़ाना हजारों वादियों और वकीलों की आवाजाही से गुलज़ार रहने वाले जिला न्यायिक परिसर (District Judicial Complex) के मुख्य द्वार पर हुआ। यह इलाका इस्लामाबाद के G-11 सेक्टर में स्थित है, जो संसद, सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय से मात्र 15 किलोमीटर दूर है।
पुलिस के अनुसार, एक अकेले आत्मघाती हमलावर ने परिसर में प्रवेश करने की बार-बार असफल कोशिशों के बाद मुख्य द्वार पर खुद को उड़ा लिया। पाकिस्तानी इंटेरियर मिनिस्टर मोहसिन नक़वी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में हमलावर को धमाके से ठीक पहले अदालत परिसर के आसपास घूमते हुए देखा गया। उन्होंने कहा, “जब पुलिस की गाड़ी वहां पहुंची, तभी उसने खुद को उड़ा लिया। अदालत में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की जांच होती है, इसलिए जब वह अंदर नहीं जा सका, तो उसने पुलिस वाहन को निशाना बनाया।”
जांच एजेंसियों का मानना है कि हमलावर इस्लामाबाद से बाहर से आया था। डॉन अख़बार के अनुसार, हमलावर शुक्रवार (7 नवंबर) को शहर में दाखिल हुआ और पिर वाधाई इलाके से मोटरसाइकिल पर न्यायिक परिसर तक पहुंचा। उसके पास एक 4–5 किलो का विस्फोटक था जिसमें बॉल बेयरिंग्स भी भरे गए थे। अधिकारियों ने बताया कि जांच में 92 सीसीटीवी फुटेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से खंगाले जा चुके हैं। यह आत्मघाती हमला इस्लामाबाद में हाल के वर्षों का सबसे घातक हमला माना जा रहा है। इससे पहले सितंबर 2008 में मैरियट होटल बम विस्फोट में 50 से अधिक लोग मारे गए थे।
घटनास्थल पर मौजूद वकील भयावह दृश्य का वर्णन करते हुए कहते हैं कि परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
एक वकील ने बताया, “मैं कार पार्क कर रहा था जब तेज़ धमाका हुआ। लोग जान बचाने के लिए अंदर भागने लगे। मैंने दो लाशें गेट पर पड़ी देखीं और कई कारें जल रही थीं।” एक अन्य वकील मोहम्मद शाहज़ाद बट्ट ने बताया, “यह बहुत ज़ोरदार धमाका था। मैंने कम से कम पांच शव गेट के पास देखे।” इस्लामाबाद बार काउंसिल के सदस्य राजा अलीम अब्बासी ने अल-जज़ीरा से कहा, “धमाका इतना शक्तिशाली था कि पूरा परिसर हिल गया। मैंने देखा, आत्मघाती हमलावर का सिर उछलकर मेरे सामने आ गिरा।”
हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार (JuA) नामक संगठन ने ली है, जो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से 2014 में अलग हुआ था। यह संगठन अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत के लालपुरा इलाके से संचालित है। JuA पहले भी पाकिस्तान में कई भीषण हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है। जिनमें अगस्त 2015 में पंजाब के गृह मंत्री शुजा खांज़ादा की हत्या, 2016 में लाहौर के गुलशन-ए-इक़बाल पार्क में हुआ हमला (जिसमें 70 से अधिक लोग मारे गए) और अमेरिकी दूतावास के दो कर्मचारियों की हत्या शामिल है।
हालांकि इस बार JuA ने जिम्मेदारी ली है, मगर इसकी मूल संगठन TTP ने किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इंकार किया है।
दौरान मोहसिन नक़वी ने कहा, “हम पूरी जांच के साथ आगे बढ़ेंगे। चाहे स्थानीय हों या विदेशी, जो भी इस हमले में शामिल हैं, उन्हें सज़ा दी जाएगी।” वहीं रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़ ने अफगानिस्तान पर उंगली उठाते हुए कहा कि “यह हमला इस्लामाबाद तक युद्ध लाने की कोशिश है” और पाकिस्तान इसे “चेतावनी के रूप में” लेगा।
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक कदम आगे बढ़कर भारत पर आरोप लगाया कि “भारत समर्थित आतंकी गुट” अफगान धरती से पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया।
नई दिल्ली ने इन आरोपों को सख्ती के साथ खारिज किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,
“भारत उन झूठे और आधारहीन आरोपों को पूरी तरह अस्वीकार करता है, जो पाकिस्तान की हताश राजनीतिक नेतृत्व कर रहा है। यह ध्यान भटकाने की कोशिश है ताकि जनता का ध्यान पाकिस्तान के अंदर चल रहे सैन्य-राजनीतिक संघर्ष से हटाया जा सके।” उन्होंने जोड़ा कि, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान की इन दुष्प्रचार रणनीतियों से भलीभांति परिचित है।”
इस्लामाबाद में यह धमाका न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की कमजोरी को उजागर करता है, बल्कि पाकिस्तान के गैरजिम्मेदाराना रवैय्ये से क्षेत्रीय तनावों को भी फिर एक बार भड़का सकता है।
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