ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले: खामेनेई के दफ्तर पर धमाका

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले: खामेनेई के दफ्तर पर धमाका

India's advisory after the attacks on Iran; Israeli citizens advised to be 'extremely vigilant'

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इजरायल और अमेरिका ने शनिवार (28 फरवरी)को ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए। यह कार्रवाई जिनेवा में हाल ही में हुई परमाणु वार्ता में अमेरिका और ईरान के बीच समझौता न हो पाने के कुछ दिनों बाद सामने आई है।

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ने कहा कि देश को तत्काल प्रभाव से आपातकाल की स्थिति में रखा गया है। उनके मंत्रालय के बयान में कहा गया, “इज़राइल ने ईरान के हमले से पहले उस पर हमला किया है। रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने पूरे देश में तुरंत इमरजेंसी की घोषणा कर दी है।”

इजरायली रक्षा बलों (IDF) के होम कमांड ने नागरिकों को बम शेल्टर के पास रहने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। संदेश में कहा गया कि सुरक्षा कारणों से नागरिक यह सुनिश्चित करें कि उन्हें अपने निकटतम सुरक्षित शेल्टर की जानकारी हो और अनावश्यक यात्रा न करें।

आयतुल्ला के कार्यालय के पास हमला

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के दफ्तर के निकट क्षेत्र को निशाना बनाया गया है। 86 वर्षीय खामेनेई उस समय अपने कार्यालय में मौजूद थे या नहीं, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी है। हाल के दिनों में अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच वे सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। वहीं रायटर्स ने एक अधिकारी के हवाले से खबर दी है कि खामेनेई तेहरान छोड़कर एक सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं।

शनिवार (28 फरवरी) सुबह तेहरान से सामने आए वीडियो में इमारतों से धुआं उठता दिखाई दिया और शहर में कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। इजरायल द्वारा हमले की पुष्टि के बाद ईरान की राजधानी में और भी धमाके हुए। हालांकि, अब तक किसी भी पक्ष ने हताहतों की आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है।

इस बीच, इजरायली हमले के बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। क्षेत्र में पहले से ही अमेरिकी लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की बड़ी तैनाती की खबरें हैं, जिन्हें ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

मौजूदा घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में व्यापक सैन्य टकराव की आशंका को बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह तनाव पूर्ण युद्ध में बदलता है या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया जा सकेगा।

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