कांडला पोर्ट पर जापानी प्रतिनिधिमंडल की नजर

शिपबिल्डिंग और मरम्मत क्षेत्र में सहयोग की संभावना

कांडला पोर्ट पर जापानी प्रतिनिधिमंडल की नजर

Japanese delegation sets sights on Kandla Port

गुजरात के कांडला क्षेत्र में समुद्री अवसंरचना और शिपबिल्डिंग क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से एक जापानी प्रतिनिधिमंडल ने दौरा किया। इस यात्रा को भारत और जापान के बीच बढ़ते समुद्री सहयोग और निवेश रुचि के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने कांडला स्थित दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह के साथ बैठक की, जिसमें शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयर इकोसिस्टम में संभावित साझेदारी पर विस्तार से चर्चा हुई। कांडला पोर्ट को भारत की दीर्घकालिक पोर्ट-आधारित विकास रणनीति के तहत एक प्रमुख समुद्री केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

बैठक के दौरान सुशील कुमार सिंह ने पोर्ट पर चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि ये परियोजनाएं राष्ट्रीय शिपबिल्डिंग मिशन और मैरीटाइम इंडिया विजन के अनुरूप हैं, जिनका उद्देश्य देश में जहाज निर्माण क्षमता को मजबूत करना और विदेशी सुविधाओं पर निर्भरता को कम करना है।

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने पोर्ट की मौजूदा परिचालन क्षमता, बुनियादी ढांचे की तैयारियों और भविष्य की विस्तार योजनाओं में गहरी रुचि दिखाई। अधिकारियों के अनुसार, कांडला की पश्चिमी तट पर रणनीतिक स्थिति, बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि और विकसित हो रहा औद्योगिक इकोसिस्टम इसे बड़े पैमाने पर समुद्री परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बनाता है।

दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कांडला और आसपास के वीरा क्षेत्र में संभावित शिपयार्ड स्थलों का निरीक्षण भी किया। उन्हें पोर्ट के संचालन क्षेत्र, लॉजिस्टिक नेटवर्क और प्रस्तावित विकास क्षेत्रों की विस्तृत जानकारी दी गई, जिससे परियोजनाओं की व्यवहार्यता का आकलन किया जा सके।

अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भारत के समुद्री क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश को शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयर सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के प्रयासों का हिस्सा है।

बैठक सकारात्मक माहौल में समाप्त हुई, जहां दोनों पक्षों ने भविष्य में निवेश और तकनीकी सहयोग के अवसरों पर बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई। अब आगे विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन और परामर्श के बाद इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

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