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पाकिस्तान में आईएसआई की निगरानी में एकजुट हो रहे जिहादी और सांप्रदायिक आतंकी गुट!

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आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत के बीच तालमेल बढ़ाने की कोशिशें जारी है।  पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की रणनीतिक साजिश के तहत यह किया जा रहा है। हालिया घटनाक्रम में IS खुरासान प्रांत के कमांडर मीर शफीक मेंगल द्वारा लश्कर-ए-तैयबा का नेता राना मोहम्मद अशफाक को हथियार भेंट कर इस साझेदारी की शुरुवात की गई है।

पाकिस्तानी इस्टैब्लिशमेंट आतंकवाद को राष्ट्र की नीति का सुनियोजित औजार बनाकर इस्तेमाल करते आई है। आईएसआई इस पूरे तंत्र की केंद्रबिंदु है, जो केवल आतंकी संगठनों को संरक्षण नहीं दे रहीं, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत और हमास जैसे संगठनों को जोड़कर एक तरह का इस्लामिक जिहाद छेड़ने की तैयारी कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में मुरिदके स्थित लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय को ध्वस्त करने के बाद इन संगठनों के आपसी संबंध उजागर हुए, जिसके चलते आईएसआई ने अपने प्रयास और तेज कर दिए है। आईएसआई ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को अलग-अलग काम करने के बजाय एक “पैक” के रूप में साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया है। हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तानी सेना के अधिकारी खुले तौर पर आतंकियों के जनाजों में शामिल होते देखे जा रहे हैं, वहीं राजनेता लश्कर-ए-तैयबा के उपनेता सैफुल्लाह कसूरी के साथ मंच साझा कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर रऊफ परेड के दौरान राज्य के संरक्षण में जिहाद के लिए भर्ती को आसान बता चूका है, साथ ही हाफिज सईद का बेटा भी तल्हा सईद भी इस परेड में मौजूद रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईएसआई से जुड़े इस नेटवर्क में लश्कर-ए-तैयबा की शहरी लॉजिस्टिक्स और ऑपरेटिव क्षमताओं को जैश-ए-मोहम्मद की आत्मघाती हमलों की क्षमता के साथ जोड़ा गया है, जिसे हमास से मिलने वाले सामरिक सहयोग से और मजबूती मिली है। इस गठजोड़ का उद्देश्य भारत के खिलाफ लंबे समय तक हिंसा जारी रखना है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी जोर दिया गया है कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस भारतीय सुरक्षा बल इस नई चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ड्रोन जैमर, एंटी-ड्रोन स्वार्म और लेजर काउंटरमेजर्स आईईडी गिराने जैसी साजिशों को नाकाम करने के लिए तैनात हैं। इसके साथ ही, सटीक तोपखाने, एक्सो-सूट और पैरा स्पेशल फोर्सेज की त्वरित प्रतिक्रिया इकाइयां हाइब्रिड फिदायीन हमलों और शहरी घेराबंदी जैसी स्थितियों से निपटने को तैयार हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सेंसर ग्रिड और रणनीतिक हेलीकॉप्टर पैड त्वरित कार्रवाई को संभव बनाते हैं, जबकि साइबर यूनिट्स हवाला नेटवर्क और दुष्प्रचार अभियानों को बाधित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। भारतीय सशस्त्र बल जम्मू-कश्मीर में किसी भी प्रकार के हवाई समर्थन को रोकने के लिए आसमान की निगरानी कर रहे हैं और विदेशी खुफिया सूचनाओं के संभावित दुरुपयोग से भी सतर्क हैं।

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