24 जनवरी 1924 को जन्मे कर्पूरी ठाकुर न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरे देश के एक अनूठे नेता थे। कई मायनों में वे दुर्लभ गुणों वाले थे। स्कूल से निकलते ही वे समाजवादी धारा से जुड़े और आजीवन समाजवादी ही रहे।
कर्पूरी ठाकुर के लिए एक कवि ने लिखा था, “वो आदमी, जो भीड़ से घिरा बहुतों की नजर में सिरफिरा है, वो आदमी, जो भीड़ में घिरा है, दरअसल परमात्मा नहीं, भीड़ की आत्मा है।” ये शब्द भर नहीं, बल्कि कर्पूरी ठाकुर के व्यक्तित्व को बयां करती स्याही की जुबान है।
उनकी सादगी का एक किस्सा यह है कि जब उन्हें एक प्रतिनिधिमंडल में चुना गया था, जिसे ऑस्ट्रेलिया जाना था, तब कर्पूरी ठाकुर के पास कोई कोट नहीं था। उन्होंने दोस्त से कोट लिया, लेकिन वह भी फटा हुआ था। लेकिन बेझिझक होकर कर्पूरी ठाकुर वही कोट पहन ऑस्ट्रेलिया चले गए। कहा जाता है कि युगोस्लाविया के मार्शल टिटो की जब नजर कर्पूरी ठाकुर के कोट पर पड़ी थी, तो उन्होंने देखा कि वह फटा हुआ था। बाद में युगोस्लाविया के मार्शल टिटो ने कर्पूरी ठाकुर को एक नया कोट गिफ्ट किया।
कबीर की पंक्तियों के सहारे पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने कर्पूरी ठाकुर के जीवन पर लिखा, “दास कबीर जतन से ओढी, जस की तस धर दीन्हीं चदरिया।”
पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने एक बार लिखा, “वे राजनीति के सहारे नहीं चलते थे, बल्कि राजनीति उनके सहारे चलती थी। वे आजीवन स्वतंत्र नेता नहीं रहे, बल्कि किसी न किसी के अधीन काम करते रहे।
जेपी और राम मनोहर लोहिया उनके गुरु रहे। ये वह शख्सियतें थीं, जो मानती थीं कि गैर-कांग्रेसवाद की राजनीति में भ्रष्टाचार खत्म कर देश को आगे ले जाना है। उसी राह पर कर्पूरी ठाकुर चले और यही ईमानदारी उनके जीवन का हिस्सा रही।
एक समय कर्पूरी ठाकुर के आवास पर बैठक थी, जिसमें चंद्रशेखर भी आए। उन्होंने देखा कि मुख्यमंत्री के कुर्ते की जेब फटी हुई है। चंद्रशेखर ने अपने कुर्ते को एक आंचल की तरह किया और मीटिंग में आए लोगों से चंदा लेने लगे। उन्होंने सभी से चंदा इकट्ठा किया और कर्पूरी ठाकुर को देने गए थे।
लोकतंत्र को अपना धर्म मानने वाले कर्पूरी ठाकुर जब-जब चुनाव मैदान में उतरे, तब-तब चुनाव का पहला चंदा लेने के लिए वे अपनी मां के पास गए। कभी एक आना तो कभी आठ आना, उन्होंने चुनाव में धन के दुरुपयोग की जगह उसके न्यूनतम उपयोग की सीमा को समझा और समझाया भी।
मिश्रित वैश्विक संकेतों से सपाट खुला शेयर बाजार, फार्मा सेक्टर में खरीदारी!



