एक नई जिंदगी की शुरुआत, हाथों में सजी मेहंदी, मांग में भरा सिंदूर, और उन सात फेरों की कसमें… मगर इन्हीं कसमों के बीच कहीं छिपा था एक ऐसा राज, जो 15 दिनों में ही खूनी खेल में बदल गया। यह कहानी है दिलीप यादव की,जो प्रेम के नाम पर छल को पहचाना नहीं पाया और जब पहचाना, तब तक उसकी सांसें साथ छोड़ चुकी थीं।
5 मार्च 2025 को दिलीप यादव ने प्रगति को अपनी दुल्हन बनाया। समाज के सामने वे पति-पत्नी थे, लेकिन इस रिश्ते में दरार थी एक अधूरे प्रेमकहानी की, एक ऐसा अतीत जिसे प्रगति कभी छोड़ नहीं पाई। अनुराग, यह वही युवक था जिससे प्रगति चार साल से प्रेम करती थी। समाज ने कभी इस प्रेम पर अपनी मोहर नहीं लगाई पर क्या प्रेम इतनी आसानी से हार मान लेता है?
यूपी के औरैया जिले 19 मार्च को सहार थाना क्षेत्र के पलिया गांव में दिलीप यादव घायल अवस्था में गेहूं के खेत में पड़ा मिला। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के भाई की शिकायत पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
एसपी अभिजित आर. शंकर के अनुसार, जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि एक व्यक्ति दिलीप को बाइक पर बैठाकर खेतों की ओर ले जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर रामजी नागर नाम के व्यक्ति को हिरासत में लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह हत्या दिलीप की पत्नी प्रगति यादव और उसके प्रेमी अनुराग यादव ने मिलकर करवाई थी।
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पुलिस के अनुसार, प्रगति और अनुराग पिछले चार सालों से एक-दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन परिवार ने उनकी शादी से इनकार कर दिया और प्रगति की शादी दिलीप से करा दी। शादी के बाद भी प्रगति अनुराग के संपर्क में रही और दोनों ने दिलीप को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। उन्होंने सुपारी किलर रामजी नागर को 2 लाख रुपये में हत्या की सुपारी दी। एडवांस में 1 लाख रुपये दिए गए और बाकी रकम हत्या के बाद देने की बात हुई।
घटना के दिन, रामजी ने किसी बहाने दिलीप को बाइक पर बैठाया और खेतों में ले जाकर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और आगे की जांच जारी है।