पश्चिम अफ्रीकी देश माली में आतंकवादी हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। पांच भारतीय नागरिकों के अपहरण की खबर सामने आई है। सरकारी और सुरक्षा सूत्रों ने शनिवार (8 नवंबर)को इसकी पुष्टि की। बताया जा रहा है कि सशस्त्र आतंकियों ने उन्हें गुरुवार(6 नवंबर) को अगवा कर लिया तब ये सभी भारतीय कोबरी (Kobri) क्षेत्र में विद्युत (इलेक्ट्रिफिकेशन) परियोजना पर कार्यरत थे ।
एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) ने बताया कि यह परियोजना एक निजी कंपनी के तहत चल रही थी, जिसमें भारतीय कर्मचारी तकनीकी कार्य संभाल रहे थे। कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा, “हम पुष्टि करते हैं कि पाँच भारतीय नागरिकों का अपहरण हुआ है। कंपनी में कार्यरत अन्य भारतीयों को सुरक्षा कारणों से राजधानी बामको (Bamako) पहुँचा दिया गया है।” अभी तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है।
माली वर्तमान में एक सैन्य जुंटा (Military Junta) के नियंत्रण में है। 2012 से यहां अस्थिरता और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, जिसके बाद से अल-कायदा से जुड़े आतंकवादी समूह और ISIS-समर्थित लड़ाके कई क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ा चुके हैं। सबसे सक्रिय गुटों में से एक ग्रुप फॉर द सपोर्ट ऑफ इस्लाम एंड मुस्लिम्स (Jama’at Nasr al-Islam wal-Muslimin, JNIM) है, जिसने हाल ही में ईंधन आपूर्ति पर गंभीर प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे आर्थिक संकट और गहरा गया है।
सितंबर में भी JNIM के लड़ाकों ने दो अमीराती नागरिकों और एक ईरानी को अगवा किया था, जिन्हें reportedly लगभग 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर फिरौती चुकाने के बाद छोड़ा गया।
JNIM और उससे जुड़े गुटों का प्रभाव माली के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों से बढ़कर बुर्किना फासो और नाइजर तक फैल चुका है। माली के सैन्य शासक असीमी गोइता ने सत्ता संभालते समय आतंकवाद को खत्म करने का वादा किया था। लेकिन फ्रांस और अमेरिका के साथ सुरक्षा सहयोग खत्म कर रूस की ओर झुकाव के बावजूद हालात में ठोस सुधार नहीं दिख रहा है।
हालांकि राजधानी बामको वर्तमान में सरकारी नियंत्रण में है, लेकिन आतंकियों की बढ़ती गतिविधियों से स्थानीय नागरिकों में चिंता और असुरक्षा की भावना बनी हुई है। जिन क्षेत्रों में JNIM का नियंत्रण है, वहां कड़े सामाजिक नियम लागू किए जा रहे हैं, जिनमें महिलाओं के लिए हिजाब अनिवार्य करना और आवागमन पर प्रतिबंध शामिल हैं।
भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय स्थिति पर निगरानी रख रहे हैं। फिलहाल, भारतीय नागरिकों की सुरक्षित रिहाई के प्रयासों से संबंधित कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अपहरण की यह घटना बताती है कि माली में विदेशी कर्मचारियों के लिए सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
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