आशा भोसले और लता मंगेशकर के स्वभाव में जमीन-आसमान का अंतर था। जहां एक तरफ लता जी शांत और सुलझी हुई थीं, वहीं आशा चुलबुली और हमेशा खेल-कूदने वाली थी। वे स्कूल में इतनी शरारत करती थी कि घर तक शिकायत पहुंच जाती थी। आशा भोसले को बचपन से ही गाने का शौक था और वे डेस्क पर बैठकर उंगलियों से तबला बजाती थी और उनके टीचर हमेशा शिकायत करते थे कि लड़की का मन पढ़ने से ज्यादा गाने-बजाने में लगता है।
आशा जी बचपन से खाना खाने और बनाने की शौकीन रही हैं और यही कारण है उनके यूएई, कुवैत, बहरीन, ब्रिटेन के बर्मिंघम और मैनचेस्टर में आशा नाम के रेस्तरां चलते हैं। खुद एक इंटरव्यू में सिंगर ने खुलासा किया था, उनका बचपन खाने और खेलने में निकला और उन्हें बुद्धि से थोड़ा कमजोर माना जाता था। मुझे घर का काम करना और रसोई में खाना पकाना बहुत पसंद था। मुझे घर में सभी पहलवान, पठान और मोटी बिल्ली के नाम से बुलाते थे।
सिंगर ने कहा था कि लता दीदी अपने अंदर सभी भावनाओं को छिपा लेती थी, लेकिन मैं सबके सामने बोल देती थी। मुझे किसी से हिचक महसूस नहीं होती है। मुझे बचपन में मलाई खाना बहुत पसंद था और आज भी खाती हूं और खूब सारा दूध भी पीती हूं। यही कारण है कि आज तक मैं इसलिए गा पा रही हूं कि क्योंकि मैंने मलाई और दूध खूब सारा पीया है।
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