म्युनिक सुरक्षा सम्मलेन 2026: विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “भारत रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति प्रतिबद्ध है”

रुसी तेल आयत पर अमेरिकी दावे के बाद भारत का जवाब

म्युनिक सुरक्षा सम्मलेन 2026: विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “भारत रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति प्रतिबद्ध है”

Munich Security Conference 2026: "India remains committed to strategic autonomy," says External Affairs Minister Jaishankar

अमेरिका द्वारा रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर ताज़ा प्रतिबंध लगाए जाने और वॉशिंगटन की ओर से भारत के रूसी तेल आयात बंद करने के दावों के बीच भारत ने वैश्विक मंच से स्पष्ट संकेत दिया है कि उसकी ऊर्जा खरीद लागत, जोखिम और उपलब्धता के आधार पर तय होगी, न कि किसी राजनीतिक दबाव में।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने म्युनिक सुरक्षा सम्मलेन में बोलते हुए भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को ने दावा किया कि भारत ने अतिरिक्त रूसी कच्चा तेल खरीदना बंद करने पर सहमति दी है।

रूसी समाचार एजेंसी तास के हवाले से रूबियो के बयान में कहा गया, “यूनाइटेड स्टेट्स ने रूस के तेल पर और बैन लगा दिए हैं। भारत के साथ हमारी बातचीत में, हमें उनसे और रूसी तेल खरीदना बंद करने का वादा मिला है। यूरोप ने आगे बढ़ने के लिए अपने कदम उठाए हैं।” इससे पहले ट्रंप ने भी कहा था, “भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका से ज़्यादा तेल खरीदने पर सहमत हो गया।”  साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे द्विपक्षीय व्यापार समझौते की अहम उपलब्धि बताया था।

इन दावों के बीच जयशंकर ने मंच से स्पष्ट कहा, “हम स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी से बहुत जुड़े हुए हैं क्योंकि यह हमारे इतिहास और हमारे विकास का एक अहम हिस्सा है। यह कुछ ऐसा है जो बहुत गहरा है, यह कुछ ऐसा है जो पॉलिटिकल स्पेक्ट्रम से भी परे है।”

ऊर्जा खरीद के सवाल पर उन्होंने वैश्विक तेल बाज़ार को जटिल बताते हुए कहा, “जहां तक ​​ऊर्जा के मामलों की बात है, आज यह एक जटिल मार्केट है। मुझे लगता है कि भारत में तेल कंपनियां, यूरोप की तरह, और शायद दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी, अवेलेबिलिटी, कॉस्ट, रिस्क को देखती हैं और वही फैसले लेती हैं जो उन्हें लगता है कि उनके सबसे अच्छे हित में हैं।”

जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या भारत व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल खरीद बंद करेगा, तो उन्होंने जवाब दिया, “अगर आपके सवाल का निचोड़ यह है, क्या मैं आज़ाद सोच वाला रहूंगा और अपने फैसले लूंगा और क्या मैं ऐसे फैसले लूंगा जो शायद आपकी सोच से मेल न खाएं, हां, ऐसा हो सकता है।”

भारत ने न तो वॉशिंगटन के दावे की पुष्टि की है और न ही औपचारिक रूप से उसका खंडन किया है। इस बीच, रूस के विदेश मंत्री सर्गे लावरोव ने ऐसे किसी आश्वासन की रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय सरकार की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आया है।

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रियायती रूसी कच्चे तेल का आयात उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है, जो अब कुल तेल आवश्यकता का लगभग 35 प्रतिशत है। वहीं अमेरिकी कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों ने अमेरिकी एलपीजी के लिए एक वर्ष का समझौता भी किया है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच फोन वार्ता के बाद अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की। इससे पहले अगस्त में रूसी तेल आयात को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था, जिसे अब वापस ले लिया गया है।

म्युनिक में जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुधार की भी वकालत की और कहा कि कोविड-19 महामारी, यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में तनाव और चीन के उदय जैसी घटनाओं ने मौजूदा वैश्विक ढांचे की सीमाओं को उजागर किया है। कुल मिलाकर, भारत ने स्पष्ट किया है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भी उसकी विदेश और ऊर्जा नीति का अंतिम निर्णय राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक स्वायत्तता के सिद्धांत पर आधारित रहेगा।

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