लवलेश के खिलाफ लातेहार सहित आसपास के कई इलाकों में संगीन अपराधों के मामले दर्ज हैं। कई बार वह पुलिस से छिपने में सफल रहा, लेकिन लगातार छापेमारी और अभियान ने उसे घेर लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लवलेश ने अन्य के नाम पर एक वाहन भी खरीदा था, लेकिन आर्थिक तंगी और संगठन की कमजोर स्थिति के चलते वह अंततः सरेंडर करने को राजी हुआ।
इससे पहले 18 जून को जेजेएमपी के एरिया कमांडर बैजनाथ सिंह ने भी डीआईजी नौशाद आलम, एसपी कुमार गौरव और कमांडेंट राकेश कुमार की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया था। बैजनाथ सिंह मनिका थाना क्षेत्र के शैलदाग गांव के निवासी हैं और कई वर्षों से नक्सली गतिविधियों में शामिल थे। पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने जेजेएमपी के कई शीर्ष नक्सली कमांडरों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया है।
संगठन के सुप्रीमो पप्पू लोहरा दो माह पहले मुठभेड़ में मारा गया था। उसके बाद लवलेश गंझू ही संगठन का आखिरी बड़ा नक्सली बचा था। लगातार पुलिस की सख्त कार्रवाई और दबाव के कारण, वह अब संगठन से अलग होकर भागते-फिरते अंततः आत्मसमर्पण करने को मजबूर हो गया।
इसके पहले अप्रैल महीने में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला के रहने वाले नक्सली अमरजीत बृजिया और मिथलेश कोरबा ने भी लातेहार जिला पुलिस और सीआरपीएफ अफसरों के समक्ष सरेंडर किया था।
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