वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में फटे हाल पाकिस्तान भी भारत से ऊपर

जानें कितनी विश्वसनीय है रिपोर्ट

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में फटे हाल पाकिस्तान भी भारत से ऊपर

Pakistan also ranks above India in the World Happiness Report.

संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस के आसपास जारी की जाने वाली वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स 2026 में एक बार फिर भारत को पिछे रखकर अपनी विश्वसनीयता पर चोट पहुंचाई है। रिपोर्ट में फिनलैंड, आइसलैंड और डेनमार्क को दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में शीर्ष स्थान मिला है, जबकि पाकिस्तान को 109वें और भारत को 118वें स्थान पर रखा गया है।

इस रैंकिंग को लेकर कई सवाल उठाए जा रहें है, खासकर इसीलिए क्योंकि फटे हाल पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट, आंतरिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। पाकिस्तान में आटे-दाल का संकट बना हुआ है, बढ़ती महंगाई, आतंकी हमले और राजनीतिक उथल-पुथल जैसी समस्याओं से आम पाकिस्तानी नागरिक का जीवन बद से बदतर हो चूका हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान को वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत से ऊपर स्थान मिलना कई लोगों के लिए हैरानी का विषय है।

रिपोर्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट मुख्य रूप से “कैंट्रिल लैडर” नामक एक सवाल पर आधारित होती है, जिसमें लोग अपने जीवन को स्वयं अंक देते हैं। यह डेटा “गैलप वर्ल्ड पोल” के जरिए जुटाया जाता है, जिसमें हर देश से औसतन करीब 1,000 लोगों से बातचीत की जाती है।

भारत जैसे इतने बड़े और विविधतापूर्ण देश के लिए इतनी छोटी सैंपल साइज पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती। रिपोर्ट के अनुसार, तीन वर्षों के डेटा को मिलाकर औसतन 3,000 लोगों के जवाबों के आधार पर रैंकिंग तैयार की जाती है, जिससे सैंपलिंग एरर कम करने का दावा किया जाता है। हालांकि, आलोचकों के मुताबिक यह संख्या 140 करोड़ की आबादी वाले देश की वास्तविक स्थिति को दर्शाने के लिए अपर्याप्त है।

इसके अलावा, सर्वेक्षण में फोन और आमने-सामने दोनों माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जिससे उत्तरदाताओं की पहचान, उनकी समझ और उनके सामाजिक परिवेश के प्रभाव को लेकर भी संदेह बना रहता है।

रिपोर्ट में खुशी के निर्धारण के लिए छह प्रमुख कारक सामाजिक सहयोग, प्रति व्यक्ति जीडीपी, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, जीवन के फैसले लेने की स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार से मुक्ति को आधार बनाया गया है। आलोचकों का तर्क है कि इन मानकों पर भारत कई मामलों में पाकिस्तान से बेहतर स्थिति में है।

भारत जहां दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, वहीं पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य देशों की वित्तीय सहायता पर निर्भर रहा है। स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और लोकतांत्रिक संस्थाओं के स्तर पर भी दोनों देशों के बीच बड़ा अंतर देखा जाता है।

यह पहली बार नहीं है जब किसी अंतरराष्ट्रीय सूचकांक पर सवाल उठे हों। इससे पहले 2022 में ग्लोबल हंगर इंडेक्स को लेकर भारत सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई थी। यह रिपोर्ट भी भ्रामक तथा पद्धतिगत खामियों से ग्रस्त थी। सरकार का कहना था कि ऐसे सूचकांक जमीनी वास्तविकताओं और सरकारी प्रयासों को नजरअंदाज करते हैं।

कुछ विशेषज्ञों ने यह भी तर्क दिया है कि कई वैश्विक सूचकांक विशेषज्ञों की व्यक्तिगत राय और पूर्वाग्रहों से प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिकी समाजशास्त्री साल्वाटोर बाबोन्स ने अपने अध्ययन में कहा था कि “विशेषज्ञों की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद भी इन रैंकिंग्स को प्रभावित करती है, जिससे उनकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगता है।”

कुल मिलाकर, वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026 ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सूचकांक वास्तव में देशों की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं या फिर सीमित डेटा और व्यक्तिपरक मानकों के कारण भ्रामक निष्कर्ष पेश करते हैं।

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