26 C
Mumbai
Friday, January 2, 2026
होमदेश दुनियागंभीर रूप से असुरक्षित है आईएमएफ की खैरात पर टिकी पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था:...

गंभीर रूप से असुरक्षित है आईएमएफ की खैरात पर टिकी पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था: रिपोर्ट

देश में एक ‘सर्वाइवलिस्ट’ (जीवित रहने भर की) अर्थव्यवस्था संस्थागत रूप ले चुकी है, जिसमें हर नीतिगत फैसला इस डर से लिया जाता है कि कहीं IMF कार्यक्रम पटरी से न उतर जाए।

Google News Follow

Related

पाकिस्तान की खैरात पर जीवित अर्थव्यवस्था एक ऐसे दौर में फंसती दिख रही है, जहां नीतियों का उद्देश्य दीर्घकालिक विकास नहीं बल्कि अगली अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) समीक्षा को पार करना भर रह गया है। बिज़नेस रिकॉर्डर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में एक ‘सर्वाइवलिस्ट’ (जीवित रहने भर की) अर्थव्यवस्था संस्थागत रूप ले चुकी है, जिसमें हर नीतिगत फैसला इस डर से लिया जाता है कि कहीं IMF कार्यक्रम पटरी से न उतर जाए। नतीजतन, अर्थव्यवस्था पहले की तरह ही असुरक्षित बनी हुई है और आगे भी एक और IMF बेलआउट की ओर बढ़ती नजर आ रही है।

अर्थशास्त्री शाहिद सत्तार द्वारा लिखी गई इस रिपोर्ट में पाकिस्तान की संरचनात्मक कमजोरियों को रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान दीर्घकालिक ‘ट्विन डेफिसिट’ से जूझ रहा है एक ओर वित्तीय घाटा, यानी सरकार का खर्च उसकी आय से अधिक होना, और दूसरी ओर भुगतान संतुलन संकट, जिसमें देश जितना विदेशी मुद्रा कमाता है, उससे कहीं अधिक खर्च करता है। रिपोर्ट में कहा गया, “पचास वर्षों से हमारे आयात, जीडीपी के प्रतिशत के रूप में, निर्यात के मुकाबले लगभग दोगुने रहे हैं। सरल शब्दों में, पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो उत्पादन करने में विफल रहा है।”

रिपोर्ट आईएमएफ के दृष्टिकोण की कड़ी आलोचना करती है और इसे मूल्य सृजन की कीमत पर राजस्व वसूली पर ‘कट्टर’ जोर देना कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, “कड़े वित्तीय लक्ष्यों को किसी भी कीमत पर पूरा करने के दबाव में, आईएमएफ ने ऐसी नीतियों को बढ़ावा दिया है जो उस निर्यात-आधारित वृद्धि को ही दबा देती हैं, जो कर्ज के चक्र से बाहर निकलने के लिए जरूरी है।”

रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि राज्य संरक्षण पर आधारित पाकिस्तान का पुराना आर्थिक मॉडल खामियों से भरा था और संसाधनों का सही आवंटन नहीं कर पाया। हालांकि, इसमें एक अहम अंतर को रेखांकित करते हुए कहा गया, “नशेड़ी को नशे से छुड़ाने और एक स्वस्थ व्यक्ति को भूखा रखने में फर्क होता है। आईएमएफ कार्यक्रम समर्थन और सब्सिडी हटाने तथा वैध व्यवसायों के लिए जरूरी पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करने के बीच फर्क नहीं कर पाता।”

कागज़ों पर आईएमएफ कार्यक्रम वित्त मंत्री और स्टेट बैंक के गवर्नर के साथ तय होते हैं और लेटर ऑफ इंटेंट में दर्ज सभी नीतियां तकनीकी रूप से सरकार की मानी जाती हैं। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, “वास्तविकता में, कार्यक्रम उन ताकतों की इच्छा को दर्शाता है जिनके पास सबसे अधिक राजनीतिक और आर्थिक दबदबा है। जब नीतियां विफल होती हैं, तो आईएमएफ कहता है कि सरकार ने उन्हें बनाया; सरकार कहती है कि आईएमएफ ने उनपर थोपा है। यह अस्पष्टता देश और उसके नागरिकों को छोड़कर सभी के लिए सुविधाजनक है।”

रिपोर्ट का निष्कर्ष चेतावनी भरा है। इसमें कहा गया, “जब तक हम आईएमएफ कार्यक्रमों की संकीर्ण, राजस्व-केंद्रित सीमाओं से अपनी नीति-निर्माण प्रक्रिया को वापस नहीं लेते, तब तक हम संकट का प्रबंधन नहीं कर रहे, बल्कि अपने ही पतन का प्रबंधन कर रहे हैं।”

यह भी पढ़ें:

स्वित्ज़रलैंड के ‘स्की रिसॉर्ट’ में न्यू ईयर पर भीषण अग्निकांड; 40 की झुलसकर मौत, 115 घायल

बांग्लादेश: हिंदू व्यापारी पर जिहादी भीड़ का हमला, चाकू से गोदा, पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने EVM पर करवाया सर्वे; 83% से अधिक ने EVM पर जताया भरोसा

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,529फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
285,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें