पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा संघर्ष अब खुले युद्ध में तब्दील होता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ द्वारा अफगानिस्तान के खिलाफ खुला युद्ध घोषित किए जाने के बाद रविवार (1 मार्च) सुबह काबुल में जोरदार विस्फोटों और गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, विस्फोटों के बाद तालिबान बलों ने काबुल के आसमान में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों पर एंटी-एयरक्राफ्ट फायरिंग की।
तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने रविवार को कहा, “काबुल में पाकिस्तानी विमानों पर एंटी-एयरक्राफ्ट फायरिंग की जा रही है।” रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान बलों ने ‘ऑपरेशन रद अल-ज़ुल्म’ के तहत पाकिस्तान के मीरानशाह और स्पिनवाम स्थित सैन्य शिविरों पर भी हमले किए हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को ‘ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक’ नाम दिया था और दावा किया था कि उसने अफगानिस्तान की प्रमुख सैन्य सुविधाओं को नष्ट कर दिया है।
सीमा पर हमलों से शुरू हुआ संघर्ष:
दोनों देशों के बीच ताजा सैन्य टकराव गुरुवार (26 फरवरी) को शुरू हुआ। पाकिस्तान द्वारा अफ़ग़ानिस्तान के रिहायशी इलाकों में हवाई हमलें किए गए, जिनमें आम नागरिको को निशाना बनाया गया था। जवाब में अफगानिस्तान की इस्लामिक अमीरात फोर्सेज ने सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तानी बलों पर हमला किया। तालिबान सरकार ने इसे पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई बताया।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अफगान बलों ने डूरंड रेखा के पार पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी सेक्टरों में पक्तिका, पक्तिया, खोस्त, नंगरहार, कुनार और नूरिस्तान प्रांतों के पास समन्वित जवाबी हमले किए। बयान में दावा किया गया कि अफगान बलों ने पाकिस्तान के दो सैन्य ठिकानों और 19 चौकियों पर कब्जा कर लिया, 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और कई को जिंदा पकड़ लिया। साथ ही दर्जनों हल्के और भारी हथियार, गोला-बारूद, सैन्य आपूर्ति और एक बड़ा सैन्य परिवहन वाहन जब्त करने तथा एक पाकिस्तानी टैंक नष्ट करने का भी दावा किया गया।
काबुल, कंधार और पक्तिया पर हवाई हमले
इसके बाद पाकिस्तान ने गुरुवार और शुक्रवार (27 फरवरी) की दरम्यानी रात काबुल, कंधार और पक्तिया प्रांतों में हवाई हमले किए। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इसकी पुष्टि की। रिपोर्टों के अनुसार, काबुल के पश्चिमी बाहरी इलाके में स्थित एक हथियार डिपो को निशाना बनाया गया, जिसके बाद कई घंटों तक द्वितीयक विस्फोट होते रहे और राजधानी में घरों तक कंपन महसूस किया गया।
हालांकि, स्वतंत्र स्रोतों से दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
विफल हुआ दोहा सीज़फायर समझौता
ताजा संघर्ष पिछले वर्ष दोहा में कतर और तुर्किये की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम समझौते की विफलता को दर्शाता है। समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच समय-समय पर सैन्य झड़पें होती रही हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
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