पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर एक बार फिर हमला

पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर एक बार फिर हमला

Pakistan's Nur Khan airbase attacked again

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस पर एक बार फिर हमले की खबर सामने आई है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें रावलपिंडी का नूर खान एयरबेस, क्वेटा में 12 कोर मुख्यालय, खैबर पख्तूनख्वा का मोहम्मद एजेंसी इलाका और अन्य सैन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं।

अफगान रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा हवाई उल्लंघन के जवाब में की गई। बयान में कहा गया कि बीती रात और आज सुबह पाकिस्तानी विमानों ने काबुल, बगराम और अन्य क्षेत्रों के ऊपर उड़ान भरी, जिसे अफगानिस्तान ने अपने एयरस्पेस का उल्लंघन बताया। अफगान पक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भी इसी प्रकार का उल्लंघन हुआ तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। अफगानिस्तान ने यह भी दावा किया कि हमले पूरी सटीकता के साथ किए गए और लक्षित ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा।

हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन हमलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पाकिस्तान ने उल्टा दावा किया है कि उसके सैन्य अभियानों में अब तक 415 अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए हैं और 580 से अधिक घायल हुए हैं। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पाकिस्तानी बलों ने कम से कम 182 अफगान चौकियों को नष्ट कर दिया और 31 अन्य पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 185 टैंक, बख्तरबंद वाहन और तोपें नष्ट की गईं, जबकि 46 स्थानों को हवाई हमलों से निशाना बनाया गया।

रावलपिंडी का नूर खान एयरबेस पहले भी चर्चा में रहा है। यह वही सैन्य अड्डा है, जहां भारत ने वर्ष 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल से हमला किया था। उस कार्रवाई को लेकर उस समय क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।

वर्तमान घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान की सेना प्रमुख असीम मुनीर के नेतृत्व में सुरक्षा स्थिति को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा चल रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ते संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल, दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सीमा पार हवाई हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों के बीच स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है।

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