प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देश और दुनिया में एक बड़े नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता मोदी इस समय अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। लेकिन राजनीति में आने से पहले उनका गहरा जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से रहा है।
मोदी के संघ से जुड़ाव की कहानी लक्ष्मण राव ईनामदार, जिन्हें संघ कार्यकर्ता “वकील साहब” कहकर पुकारते थे, से शुरू होती है। महाराष्ट्र के पूना में जन्मे और वकालत की पढ़ाई करने वाले ईनामदार एक समर्पित प्रचारक थे। महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर लगे प्रतिबंध के हटने के बाद उन्हें गुजरात में संगठन विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी गई।
साल 1958 में वकील साहब वडनगर पहुंचे, जहां उन्होंने बाल स्वयंसेवकों को शपथ दिलाई। उन्हीं स्वयंसेवकों की पंक्ति में आठ साल के नरेंद्र मोदी भी खड़े थे। यह उनके जीवन का अहम मोड़ साबित हुआ।
बाद में मोदी वडनगर से अहमदाबाद आ गए, जहां उन्होंने अपने चाचा की कैंटिन में काम किया और फिर साइकिल पर चाय बेचने लगे। अहमदाबाद के गीता मंदिर के पास उनका पहला ठिया था, जहां संघ के प्रचारक और कार्यकर्ता अक्सर आते-जाते थे। धीरे-धीरे मोदी संघ के राज्यस्तरीय नेतृत्व के करीब आ गए।
पत्रकार एमवी कामत की पुस्तक में उल्लेख है कि मोदी ने अहमदाबाद स्थित संघ मुख्यालय में रहते हुए कार्यकर्ताओं के लिए नाश्ता-चाय बनाई, सफाई की और यहां तक कि ईनामदार साहब के कपड़े भी धोए। इसी अनुशासन और सेवा भावना ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया और आगे चलकर उन्हें भाजपा और देश की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया।
नरेंद्र मोदी की यह यात्रा दिखाती है कि साधारण जीवन से शुरू होकर समर्पण और कड़ी मेहनत से व्यक्ति किस तरह ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।



