भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाएं

छह अरब देशों के साथ संभावित डील क्यों होगी अहम

भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाएं

Prospects for a India-GCC free trade agreement

भारत ने छह सदस्यीय खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council—GCC) के साथ लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वार्ता फिर शुरू कर दी है। यदि यह समझौता होता है, तो भारत और GCC के बीच आर्थिक सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकता है और मौजूदा 179 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को और गति मिल सकती है। यह पहल ऐसे समय में आई है, जब भारत वैश्विक स्तर पर अपने व्यापारिक संबंधों को तेजी से विस्तार दे रहा है।

5 फरवरी को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने घोषणा की कि भारत और GCC ने संभावित FTA के लिए संदर्भ शर्तों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय भादू और GCC सचिवालय के राजा अल मरज़ूकी ने ToR पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर गोयल ने कहा, “भारत विकसित दुनिया के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को गहरा कर रहा है, ऐसे में GCC के साथ परस्पर लाभकारी आर्थिक संबंधों की पूरी क्षमता को खोलने का समय आ गया है।”

भारत-GCC FTA वार्ता की शुरुआत पहली बार 2004 में हुई थी। 2006 और 2008 में भी बातचीत आगे बढ़ी, लेकिन 2011 में GCC द्वारा वैश्विक स्तर पर व्यापार वार्ताएं रोकने के बाद यह प्रक्रिया ठहर गई। 2022 में दोनों पक्षों ने वार्ता फिर शुरू करने की घोषणा की, और 2023 में GCC ने संशोधित ToR का मसौदा साझा किया। इसके बाद निरंतर बातचीत के परिणामस्वरूप अब औपचारिक रूप से वार्ता का रास्ता साफ हुआ है। आने वाले महीनों में रियाद में पहले दौर की बातचीत होने की संभावना है, जिसमें भारत की ओर से अजय भादू और GCC की ओर से राजा अल मरज़ूकी मुख्य वार्ताकार होंगे।

GCC एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 25 मई 1981 को हुई थी। इसमें सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और ओमान शामिल हैं। GCC चार्टर के अनुच्छेद 4 के अनुसार, इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना और उनके नागरिकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। संगठन का लक्ष्य आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में समन्वय और एकीकरण को बढ़ाना है।

भारत के लिए GCC का महत्व बहुआयामी है। गोयल ने कहा, “दोनों व्यापारिक साझेदार 5,000 वर्षों से एक-दूसरे के साथ व्यापार कर रहे हैं। अब एक अधिक मजबूत और स्थिर व्यापारिक व्यवस्था की आवश्यकता है, जो वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह, नीतिगत पूर्वानुमेयता और निवेश को बढ़ावा दे।” उन्होंने यह भी बताया कि खाद्य प्रसंस्करण, इंफ्रास्ट्रकचर, पेट्रोकेमिकल्स और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों को इससे विशेष लाभ मिलेगा।

आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 में भारत-GCC व्यापार लगभग 155 अरब डॉलर था, जो 2022-23 में बढ़कर करीब 185 अरब डॉलर हो गया। 2023-24 में यह 162 अरब डॉलर रहा और 2024 में फिर बढ़कर 179 अरब डॉलर पहुंच गया। GCC देशों में यूएई भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसके बाद सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, कतर और बहरीन आते हैं। इसके अलावा, लगभग एक करोड़ भारतीय GCC देशों में रहते और काम करते हैं, और यूएई भारत में आने वाले प्रेषण (remittances) के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है।

भारत पहले ही GCC के कुछ सदस्यों के साथ व्यापार समझौते कर चुका है, जिसमें मई 2022 में यूएई के साथ FTA और दिसंबर 2025 में ओमान के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) किया गया था। ऐसे में पूरे GCC के साथ संभावित FTA भारत के लिए न केवल व्यापार, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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