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UNSC में अमेरिका को संतुलित करने की कोशिश के बीच पुतिन–नेतन्याहू की बातचीत

पश्चिम एशिया के हालात पर लंबी चर्चा

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार (15 नवंबर)को एक दुर्लभ टेलीफोन वार्ता हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। इज़रायली प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और क्रेमलिन ने संयुक्त बयान जारी कर इसकी पुष्टि की। बातचीत का मुख्य केंद्र गाज़ा पट्टी, युद्धविराम की स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दे रहे।

संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा करवाए गए युद्धविराम समझौते के कार्यान्वयन पर लंबी चर्चा हुई। इसमें इज़रायली बंधकों और फिलिस्तीनी कैदियों के आदान-प्रदान पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति, सीरिया में स्थिरता से जुड़े मुद्दे भी वार्ता के अहम हिस्से रहे।

इज़रायली PMO ने बताया कि यह बातचीत रूसी राष्ट्रपति की पहल पर हुई, जबकि क्रेमलिन ने इसे विचारों का व्यापक आदान-प्रदान बताया।

यह पहली बार नहीं है जब पुतिन और नेतन्याहू ने क्षेत्रीय हालात पर बात की हो। पिछले महीने भी दोनों नेताओं ने इसी मुद्दे पर चर्चा की थी, जिसमें पुतिन ने “फ़िलिस्तीन मुद्दे के व्यापक समाधान” का अपना रुख दोहराया था। उनकी पिछली वार्ताओं में सीरिया और ईरान से जुड़े मसले भी प्रमुख रहे थे। अगस्त में भी दोनों नेताओं की बातचीत हुई थी, जब इज़रायल में यह रिपोर्टें आई थीं कि नेतन्याहू का कार्यालय रूस के साथ कई लंबित मुद्दों को सुलझाने में सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।

यह फोन कॉल ऐसे समय में हुआ है जब रूस ने गुरुवार को गाज़ा मुद्दे पर अपना मसौदा प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पेश किया। इस कदम को अमेरिका द्वारा अपने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश के जवाब में एक चुनौती के रूप में देखा गया।

रूस के UN मिशन ने सदस्य देशों को भेजे नोट में कहा कि उसका काउंटर-प्रोपोज़ल अमेरिकी मसौदे से प्रेरित है और इसका उद्देश्य सुरक्षा परिषद को “संतुलित, स्वीकार्य और एकीकृत दृष्टिकोण” की दिशा में आगे बढ़ाना है। रूसी प्रस्ताव में, UN महासचिव से गाज़ा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल के विकल्पों की पहचान करने का आग्रह किया गया है, जबकि अमेरिकी मसौदे में प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस जैसे ट्रांज़िशनल प्रशासन का उल्लेख नहीं है।

यूक्रेन युद्ध पर रूस की जिद और अमेरिका–रूस तनाव के बीच पुतिन–नेतन्याहू संवाद को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों का बढ़ता हस्तक्षेप पश्चिम एशिया में भविष्य की शांति वार्ताओं और शक्ति समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

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