2017 में जन्मे रणवीर ने अपने संबोधन में भारत की प्राचीन दार्शनिक परंपराओं और आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बीच संबंध को समझाया और बताया कि भविष्य के निर्माण में युवाओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होने वाली है।
समिट के दौरान आईएएनएस से बातचीत में रणवीर ने कहा कि उनकी प्रस्तुति का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना था कि भारत के शाश्वत विचार आज की तकनीकी दुनिया को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे प्राचीन भारतीय दर्शन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और साथ ही यह भी बताया कि दुनिया के अलग-अलग देश अपने-अपने एआई मॉडल कैसे विकसित कर रहे हैं।
रणवीर ने हाल ही में जारी एक भारतीय एआई मॉडल से जुड़ा एक व्यावहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने समझाया कि इस तरह के नवाचार देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे सकते हैं। रणवीर ने कहा कि वे अपने उपयोग के उदाहरण के माध्यम से यह दिखा रहे हैं कि नई तकनीकें भारत की जीडीपी वृद्धि में किस तरह योगदान दे सकती हैं।
तकनीक की तेजी से बदलती दुनिया का जिक्र करते हुए रणवीर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सबसे अधिक प्रभाव युवाओं पर पड़ेगा। मिलेनियल्स के साथ-साथ जेन-जी और जेनरेशन अल्फा इस बदलाव के असली वाहक बनेंगे, क्योंकि ये पीढ़ियां डिजिटल माहौल में पली-बढ़ी हैं और नई तकनीकों को तेजी से अपनाने की क्षमता रखती हैं।
रणवीर ने यह भी कहा कि आज डेवलपर्स, सरकारें और संस्थाएं जो निर्णय ले रही हैं, वही आने वाली पीढ़ियों के जीवन और काम करने के तरीके को तय करेंगे। सम्मेलन में देश और विदेश से नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शोधकर्ता, स्टार्टअप और छात्र एक मंच पर जुटे हैं, जहां एआई नवाचार, नीति और उसके व्यावहारिक उपयोगों पर चर्चा हो रही है।
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