साइबर अपराधी तेजी से बैंकिंग और वित्तीय जानकारी चुराने में लगे हैं, जिससे आर्थिक धोखाधड़ी का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बड़ी मात्रा में धनराशि को ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े मोबाइल फाइनेंशियल सर्विस (एमएफएस) खातों के जरिए इधर-उधर भेजा जा रहा है।
पुलिस जांच के अनुसार, देश में हर पांच में से तीन लड़कियों और युवतियों ने किसी न किसी रूप में साइबर उत्पीड़न (साइबर बुलिंग) का सामना किया है। हालांकि, सामाजिक बदनामी के डर से करीब 89 प्रतिशत पीड़ित इसकी शिकायत दर्ज नहीं कराते।
वहीं, जिन लोगों ने शिकायत दर्ज कराई, उनमें से भी लगभग 72 प्रतिशत मामलों का समाधान नहीं हो पाया या उन्हें सबूतों की कमी का हवाला देकर बंद कर दिया गया। यह जानकारी बांग्लादेश के प्रमुख बंगाली अखबार डेली सन ने दी।
बांग्लादेश स्थित ‘साइबर सपोर्ट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन’ प्लेटफॉर्म की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष के पहले छह महीनों में साइबर हिंसा के शिकार लोगों में 97 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे शामिल थे। यह रिपोर्ट जनवरी 2025 से देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर हिंसा के 29 मामलों के विश्लेषण पर आधारित थी।
डेली सन की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के पुलिस आंकड़ों में बांग्लादेश के सूचना और अश्लीलता नियंत्रण अधिनियम-2012, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी अधिनियम-2006 और डिजिटल सुरक्षा अधिनियम-2018 के तहत कुल 4,794 मामले दर्ज किए गए हैं।
हालांकि, साइबर अपराधों की जांच और निपटारे के लिए एक समर्पित साइबर अपराध इकाई का अभाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
बांग्लादेश के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) अली हुसैन फकीर ने साइबर अपराध और ऑनलाइन अफवाहों के प्रसार को देश के सामने मौजूद कानून-व्यवस्था से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया है।
हाल ही में राजशाही स्थित शारदा पुलिस अकादमी में कैडेट सब-इंस्पेक्टरों के 42वें बैच की पासिंग आउट परेड के दौरान उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गैम्बलिंग, फिशिंग और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच से पता चलता है कि देश में साइबर अपराध चिंताजनक स्तर तक बढ़ गया है। डिजिटल तकनीक के अंधाधुंध इस्तेमाल का फायदा उठाकर अपराधी इसे आपराधिक गतिविधियों के एक खतरनाक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
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