‘रिच डैड, पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियासाकी ने खोली पाकिस्तान की पोल

तेल संकट के बीच भारत की स्थिरता और पाक की बदहाली का किया बड़ा खुलासा, कहा— "सच्चाई छिपाने से नहीं छिपती"

‘रिच डैड, पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियासाकी ने खोली पाकिस्तान की पोल

Robert Kisaki, author of 'Rich Dad, Poor Dad', exposes Pakistan's secrets.

प्रसिद्ध निवेशक मार्गदर्शक किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक और अमेरिकी उद्यमी रॉबर्ट कियासाकी ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी भारत और पाकिस्तान के बीच ऊर्जा सुरक्षा के गहरे अंतर को उजागर किया है। एक ओर जहाँ वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, वहीं भारत ने अपनी कीमतों को स्थिर रखा है, जबकि पाकिस्तान में तेल कीमतों के कारण हाहाकार मचा हुआ है। कियासाकी ने पाकिस्तानी नेताओं के विरोधाभासी बयानों पर तंज कसते हुए जमीनी हकीकत का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है।

हाल ही में मध्य पूर्व में ईरान संघर्ष के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में तेल और गैस आपूर्ति बाधित हुई, जिसका सबसे घातक असर पाकिस्तान पर पड़ा। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने हाल ही में स्वीकार किया कि देश के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का एक दिन का कोटा भी नहीं बचा है। यह स्वीकारोक्ति उनके उस पिछले दावे के बिल्कुल विपरीत है जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में ईंधन आपूर्ति बिल्कुल सुरक्षित और स्थिर है।

पाकिस्तानी पेट्रोलियम मंत्री मलिक ने पहले के एक संवाददाता सम्मेलन में यहाँ तक कह दिया था कि पाकिस्तान की स्थिति भारत सहित कई अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है, जहाँ कथित तौर पर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और किल्लत है। उन्होंने सरकारी सक्रिय उपायों की प्रशंसा की थी। लेकिन कियासाकी ने इस अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि सच्चाई क्या है। मंत्री ने जब कहा कि हम भारत नहीं हैं, तो कियासाकी के अनुसार वह सही थे, लेकिन उस अर्थ में नहीं जैसा वे दिखाना चाहते थे।

अप्रैल 2026 की शुरुआत में पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में जो उछाल आया, उसने आम जनता की कमर तोड़ दी। पेट्रोल की कीमत करीब 321 रुपये से बढ़कर 458 रुपये प्रति लीटर हो गई, जो एक महीने में 43 प्रतिशत की वृद्धि है। डीजल की कीमतों में और भी अधिक तीव्रता देखी गई, जो 335 रुपये से बढ़कर 520 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई, यानी सीधा 55 प्रतिशत का इजाफा। इस भारी वृद्धि के बाद पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, व्यापार ठप होने की कगार पर हैं और विपक्ष ने इसे ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ घोषित कर दिया है।

दूसरी ओर, भारत ने इस वैश्विक झटके को जिस तरह झेला, वह दुनिया के लिए एक मिसाल बन गया है। कियासाकी के अनुसार, “भारत ने कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और अब ईरान संघर्ष को बिना किसी नाटकीय मूल्य वृद्धि के पार कर लिया है।”

भारत की इस मजबूती के पीछे मुख्य कारण उसका रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी माना है कि भारत के पास आपातकालीन आपूर्ति जारी करने के लिए पर्याप्त भंडार है जिसे “एक हस्ताक्षर” के साथ जारी किया जा सकता है। वाणिज्यिक स्टॉक के साथ मिलकर यह भंडार 60-70 दिनों के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा, भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर और 2026 में वेनेजुएला से शिपमेंट फिर से शुरू करके अपने आपूर्ति नेटवर्क में विविधता लायी है। एक प्रमुख रिफाइनिंग हब होने के नाते, भारत ने घरेलू आपूर्ति की रक्षा के लिए निर्यात शुल्क को भी कुशलतापूर्वक समायोजित किया है।

पाकिस्तान के पास लगभग कोई घरेलू तेल उत्पादन नहीं है। साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आईएमएफ की सख्त शर्तों के बीच फंसे पाकिस्तान के पास इस झटके को सहने के लिए कोई उपाय नहीं दीखता। अब पाकिस्तान सरकार ने 22 अप्रैल को रणनीतिक भंडार बनाने की संभावना तलाशने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसकी रिपोर्ट 8 मई तक आनी है। लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कदम बहुत देर से उठाया गया है। रॉबर्ट कियासाकी की सोशल मीडिया पोस्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध ने इस खाई को पैदा नहीं किया, बल्कि केवल उस खोखलेपन को उजागर कर दिया जो पाकिस्तान में लंबे समय से मौजूद था।

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