रूस 47 देशों के नागरिकों को धोखा देकर भर्ती कर रहा है। इन देशों के नागरिकों को लालच देकर रूस लाया गया और फिर उन्हें युद्ध के मैदान में भेज दिया गया। इसमें भारत के लोग भी शामिल हैं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में बोलते हुए आरोप लगाया। उन्होंने दूसरे देशों से अपील की कि वे अपने नागरिकों को रूस-यूक्रेन युद्ध से दूर रखें।
ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को युद्ध में लाकर यूक्रेन पर अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहता है। नॉर्थ कोरिया के लीडर किम जोंग उन ने रूस की मदद के लिए अपने सैनिक भेजे हैं। बदले में नॉर्थ कोरिया को मॉडर्न मिलिट्री टेक्नोलॉजी मिल रही है। इसमें बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़ी मदद शामिल है। यूक्रेन ने नॉर्थ कोरिया के 2 युद्धबंदियों को साउथ कोरिया भेजा है। दोनों सैनिकों को ज़िंदा पकड़ना आसान नहीं था। युद्ध जारी रखने के लिए रूस की आर्थिक ताकत को कमज़ोर करना ज़रूरी है। उन्होंने दूसरे देशों से रूस पर दबाव बढ़ाने की अपील की ताकि उसकी युद्ध क्षमता कम हो सके।
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 227 भारतीय नागरिक रूसी सेना में भर्ती हुए थे। इनमें से 51 की मौत हो गई है और 139 को सेना से निकाल दिया गया है। भारत सरकार बाकी भारतीयों को वापस लाने के लिए रूस से बातचीत कर रही है।
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