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ड्रोन हमलों के बाद रूस ने ईंधन निर्यात पर लगाया प्रतिबंध

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यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों से तेल रिफाइनरियों को भारी नुकसान झेलने के बाद रूस ने डीज़ल और पेट्रोल (गैसोलीन) के निर्यात पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने गुरुवार (25 सितंबर)को घोषणा की कि डीज़ल निर्यात पर आंशिक रोक और गैसोलीन निर्यात पर पहले से लागू रोक को साल 2025 के अंत तक बढ़ा दिया गया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस के तेल उत्पादन पर गहरा असर डाला है। कुछ दिनों में देश का तेल रिफाइनिंग आउटपुट लगभग 20% तक घट गया, जिससे प्रमुख बंदरगाहों से ईंधन निर्यात में भी भारी गिरावट आई है।

रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि देश में तेल उत्पादों की मामूली कमी है, लेकिन मौजूदा भंडार उस कमी को पूरा करने में सक्षम हैं। नोवाक ने कहा, “हम गैसोलीन निर्यात पर प्रतिबंध को साल के अंत तक बढ़ा रहे हैं, और गैर-उत्पादकों के लिए डीज़ल निर्यात पर भी रोक लगाई जाएगी। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।”

रूस-नियंत्रित क्राइमिया के प्रमुख सर्गेई अक्स्योनोव ने बताया कि ईंधन आपूर्ति में रुकावटें कई तेल रिफाइनरियों के बंद होने के कारण उत्पन्न हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, डीज़ल निर्यात पर लागू प्रतिबंध रीसेलर्स (पुनर्विक्रेताओं) के लिए है, न कि प्रोड्यूसर्स (उत्पादकों) के लिए। हालांकि उद्योग सूत्रों का कहना है कि रूस से डीज़ल का जो हिस्सा व्यापारी निर्यात करते हैं, वह कुल निर्यात की तुलना में बहुत कम है। रूस के लगभग तीन-चौथाई डीज़ल निर्यात बाल्टिक और काला सागर बंदरगाहों की ओर जाने वाली उत्तर और दक्षिण पाइपलाइनों के माध्यम से भेजे जाते हैं।

वर्ष 2024 में रूस ने लगभग 8.6 करोड़ मीट्रिक टन डीज़ल का उत्पादन किया था, जिसमें से करीब 3.1 करोड़ टन का निर्यात किया गया। समुद्री मार्ग से डीज़ल निर्यात में रूस और अमेरिका शीर्ष स्थान पर रहे हैं। गैसोलीन निर्यात पर लगा प्रतिबंध उत्पादकों और पुनर्विक्रेताओं दोनों पर लागू होगा, हालांकि यह रूस और अन्य देशों के बीच मौजूद अंतर-सरकारी समझौतों को प्रभावित नहीं करेगा।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रूस में ईंधन की कमी तेजी से बढ़ रही है। देश की दूसरी सबसे बड़ी तेल कंपनी लुकोइल ने मॉस्को के कुछ पेट्रोल स्टेशनों पर जरी कैन (Jerry Can) में पेट्रोल बेचने पर रोक लगा दी है ताकि कालाबाज़ारी को रोका जा सके। यूक्रेन युद्ध के बीच रूस का यह कदम न केवल घरेलू अर्थव्यवस्था बल्कि वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर डाल सकता है।

रूस का यह सख्त निर्णय दर्शाता है कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र को झकझोर दिया है, और क्रेमलिन अब आंतरिक बाजार स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है, भले ही इससे उसकी निर्यात आय पर असर क्यों न पड़े।

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