रूस ने भारत को अपने उन्नत स्टेल्थ लड़ाकू विमान Su-57 के दो-सीटर संस्करण की पेशकश की है, जिसमें पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण (ToT) शामिल है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य भारत और रूस के बीच पहले ठप पड़ चुके फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (FGFA) कार्यक्रम को फिर से शुरू करना और भारतीय वायुसेना की स्टेल्थ क्षमता की कमी को अस्थायी रूप से पूरा करना है।
यह प्रस्ताव हैदराबाद में आयोजित ‘विंग्स इंडिया 2026’ प्रदर्शनी और उसके बाद दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं के दौरान सामने आया। रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) भारत को फिर से अपना प्रमुख एयरोस्पेस सहयोगी बनाने की कोशिश कर रही है।
रूस के प्रस्ताव के तहत भारत को कई महत्वपूर्ण तकनीकों तक पूर्ण पहुंच दी जाएगी, ताकि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विमान के प्रमुख हिस्सों का निर्माण देश में ही किया जा सके। इसमें नई पीढ़ी के इज़्देलिये-30 (AL-51F1) इंजन भी शामिल हैं, जिनका उड़ान परीक्षण 2025 के अंत में शुरू हुआ और अब इन्हें नए Su-57 विमानों में लगाया जा रहा है।
इसके अलावा प्रस्ताव में एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैनड एरे (AESA) रडार, उन्नत ऑप्टिकल सेंसर, ब्रह्मोस और अस्त्र जैसी भारतीय मिसाइलों के एकीकरण के लिए सोर्स कोड तक पहुंच, और लड़ाकू स्वचालन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियां भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि भारत ने 2018 में FGFA कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया था। उस समय लागत बढ़ने, भारतीय भागीदारी कम होने और Su-57 के स्टेल्थ फीचर्स तथा इंजन की विश्वसनीयता को लेकर चिंताओं के कारण यह निर्णय लिया गया था। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) परियोजना पर ध्यान केंद्रित किया। AMCA का प्रोटोटाइप 2029 तक उड़ान भरने की उम्मीद है, जबकि इसका पूर्ण उत्पादन 2030 के दशक के मध्य में शुरू हो सकता है।
रूस अब Su-57 को एक रणनीतिक सेतु के रूप में पेश कर रहा है, जिससे AMCA के विकसित होने तक भारत की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की आवश्यकता पूरी की जा सके।
रूसी प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Su-57 का एक बहु-उद्देश्यीय ट्विन-सीट संस्करण है, जिसे संभावित रूप से Su-57M नाम दिया जा सकता है। यह आधुनिक “मैनड-अनमैनड टीमिंग” (MUM-T) ऑपरेशनों के लिए तैयार किया गया है। इस कॉन्फिगरेशन में पीछे बैठा ऑपरेटर मिशन कमांडर की भूमिका निभा सकता है और ड्रोन काफ़िलो का नियंत्रण संभाल सकता है, जबकि पायलट हवाई युद्ध और संचालन पर ध्यान केंद्रित करेगा।
रिपोर्टों के अनुसार इस ट्विन-सीट संस्करण का प्रोटोटाइप कोम्सोमोल्स्क-ऑन-अमूर एयरक्राफ्ट प्लांट में तैयार किया जा रहा है और इसकी पहली उड़ान 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में हो सकती है। यह विमान मैक-2 से अधिक गति, सुपरक्रूज़ क्षमता और स्टेल्थ हमलों के साथ-साथ ड्रोन समन्वय जैसे मिशनों में सक्षम होगा।
भारतीय वायुसेना ने अपग्रेडेड Su-57M1E में रुचि दिखाई है, लेकिन वह सतर्क रुख अपनाए हुए है क्योंकि उसकी दीर्घकालिक रणनीति AMCA परियोजना पर आधारित है। रिपोर्टों के अनुसार भारत सीमित संख्या में लगभग दो स्क्वाड्रन की खरीद पर विचार कर सकता है। साथ ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में लाइसेंस प्राप्त उत्पादन की संभावना पर भी चर्चा चल रही है, जैसा पहले Su-30MKI के साथ किया गया था।
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब क्षेत्रीय सैन्य प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। चीन पहले ही 200 से अधिक J-20 स्टेल्थ फाइटर तैनात कर चुका है और भविष्य में J-31 या J-35 जैसे विमानों को पाकिस्तान को निर्यात करने की संभावना भी जताई जा रही है।
यदि भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो इससे भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण को गति मिल सकती है और रूसी स्टेल्थ तकनीक को भारतीय हथियार प्रणालियों के साथ जोड़ने का अवसर मिलेगा। हालांकि अंतिम निर्णय लेते समय भारत को तात्कालिक सैन्य जरूरत, लागत और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के अपने लक्ष्य के बीच संतुलन बनाना होगा।
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