भारत की उभरती एयरोस्पेस कंपनी सक्थि एविएशन ने चेक गणराज्य स्थित रक्षा और विमानन निर्यातक कंपनी ओम्नीपोल के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य आधुनिक 19-सीटर टर्बोप्रॉप विमान L410 NG के भारत में स्थानीय निर्माण की संभावनाओं का अध्ययन करना है। इसे भारत की स्वदेशी विमानन निर्माण क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
L410 NG, प्रसिद्ध Let L-410 विमान का उन्नत संस्करण है, जिसे मूल रूप से 1970 के दशक में चेकोस्लोवाकिया में विकसित किया गया था। यह विमान अपनी शॉर्ट टेकऑफ एंड लैंडिंग (STOL) क्षमता के लिए जाना जाता है। नए NG संस्करण में अत्याधुनिक GE H80 टर्बोप्रॉप इंजन, उन्नत एवियोनिक्स और बेहतर सुरक्षा प्रणालियाँ शामिल की गई हैं, जिससे इसकी परिचालन दक्षता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
ओम्नीपोल दशकों से L410 विमान के निर्माण और वैश्विक विपणन से जुड़ा रहा है, अब तक 50 से अधिक देशों को यह विमान आपूर्ति कर चुका है। अफ्रीका और एशिया जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में इसकी सफल तैनाती को इसकी मजबूती और भरोसेमंद प्रदर्शन का प्रमाण माना जाता है। बेंगलुरु की सक्थि एविएशन, एयरोस्ट्रक्चर, एवियोनिक्स इंटीग्रेशन और मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) सेवाओं पर केंद्रित है। वैश्विक ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) के साथ कंपनी का पूर्व अनुभव इसे तकनीक हस्तांतरण और स्थानीय असेंबली के लिए एक रणनीतिक साझेदार बनाता है।
यह MoU भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण के अनुरूप है। यदि L410 NG का निर्माण भारत में होता है, तो इससे आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और विमानन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना बनेगी।
योजना के तहत भारत में एक समर्पित विनिर्माण यूनिट स्थापित किया जा सकता है। संभावित रूप से यह यूनिट कर्नाटक या तमिलनाडु में जहां पहले से एयरोस्पेस क्लस्टर मौजूद हैं ऐसी जगह खुल सकता है। शुरुआती चरण में लाइसेंस प्राप्त उत्पादन पर ध्यान दिया जाएगा, जिसके बाद धीरे-धीरे उच्च स्थानीय सामग्री के साथ पूर्ण स्वदेशी निर्माण की ओर बढ़ने की योजना है।
भारत में L410 NG के प्रमुख उपयोगों में उड़ान (UDAN) योजना के तहत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, भारतीय वायुसेना के लिए सैन्य उपयोग और आपदा राहत अभियान शामिल हैं। बिना पक्के रनवे से संचालन की इसकी क्षमता इसे पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों जैसे दुर्गम इलाकों के लिए बेहद उपयोगी बनाती है।
इस साझेदारी का मूल आधार तकनीक हस्तांतरण है। ओम्नीपोल एयरफ्रेम निर्माण, कंपोज़िट सामग्री और एवियोनिक्स इंटीग्रेशन से जुड़ा तकनीकी ज्ञान साझा करेगा, जबकि सक्थि एविएशन आपूर्ति श्रृंखला के स्थानीयकरण और प्रमाणन प्रक्रियाओं में अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेगी।
आर्थिक दृष्टि से यह परियोजना व्यापक प्रभाव डाल सकती है। अगले पांच वर्षों में प्रत्येक L410 NG में 60 प्रतिशत तक स्वदेशी घटकों के उपयोग का लक्ष्य रखा गया है, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को सटीक इंजीनियरिंग, फोर्जिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ावा मिलेगा। दक्षिण एशिया और अफ्रीका के मित्र देशों को निर्यात की संभावना भी इस परियोजना की अहम विशेषता मानी जा रही है।
हालांकि, नियामकीय स्वीकृतियाँ एक अहम चुनौती होंगी। विमान को नागरिक उपयोग के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से प्रमाणन प्राप्त करना होगा, वहीं सैन्य भूमिका के लिए रक्षा मानकों का पालन आवश्यक होगा। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) या DRDO के साथ सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है।
इस पहल के सामने ऑफसेट दायित्वों, वित्तपोषण और कुशल मानव संसाधन के विस्तार जैसी चुनौतियाँ भी हैं। बावजूद इसके, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ और विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) से जुड़े लाभ इन बाधाओं को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब महामारी के बाद भारत का क्षेत्रीय विमानन बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है। UDAN के तहत 100 से अधिक कम-सेवा प्राप्त हवाई अड्डों के चलते किफायती 19-सीटर विमानों की मांग बनी हुई है, जिससे L410 NG को संभावित “गेम-चेंजर” माना जा रहा है।
रणनीतिक स्तर पर, यह साझेदारी रक्षा विविधीकरण के लिहाज़ से भी अहम है। भारतीय सशस्त्र बलों को काउंटर-इंसर्जेंसी, उच्च-ऊंचाई संचालन और निगरानी मिशनों के लिए बहुउपयोगी प्लेटफॉर्म की आवश्यकता है। स्थानीय L410 उत्पादन, HAL के ध्रुव हेलिकॉप्टर और स्वदेशी प्रशिक्षक विमानों का पूरक बन सकता है।
सक्थि एविएशन के नेतृत्व ने इस MoU को भारतीय विमानन आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मील का पत्थर बताया, जबकि ओम्नीपोल के सीईओ ने भारत के बढ़ते बाजार और मजबूत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को L410 NG के विस्तार के लिए आदर्श करार दिया।
लक्ष्य है कि भारत में असेंबल किए गए पहले L410 NG की उड़ान 2029 तक हो। यह पहल भारत को एक वैश्विक एयरोस्पेस विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और संकेत मानी जा रही है।
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