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Friday, February 6, 2026
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सावन विशेष: हरी चूड़ी, साड़ी और श्रृंगार? जानें महादेव से इसका संबंध!

सावन में महिलाओं का हरे रंग को अपनाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विश्वास का हिस्सा है।

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भोलेनाथ के प्रिय मास सावन का शुभारंभ 11 जुलाई से होने जा रहा है। सावन में न केवल प्रकृति हरे रंग की ओढ़नी ओढ़कर इतराती है, बल्कि पंरपराओं के अनुसार महिलाएं भी हरे रंग को अपने श्रृंगार में शामिल करती हैं, फिर वो चूड़ी हो या साड़ी, बिंदी या अन्य श्रृंगार प्रसाधन। हरे रंग का खास महत्व है और इस मास से खास कनेक्शन भी है।

धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, सावन में महिलाएं हरे रंग को अपने श्रृंगार का हिस्सा बनाती हैं। चाहे हरी चूड़ियां हों, साड़ी हो, बिंदी हो या मेहंदी। इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता है।

धार्मिक ग्रंथों में सावन को भगवान शिव का प्रिय महीना माना गया है। ग्रंथों के अनुसार, सावन में समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला, तो भोलेनाथ ने इसे अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और उन्हें नीलकंठ कहा गया। इस दौरान प्रकृति ने हरियाली की चादर ओढ़कर शिव की भक्ति में तप किया और देवी-देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया। तभी से सावन में जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

हरा रंग प्रकृति, जीवन और समृद्धि का प्रतीक है, जो भगवान शिव के सृजन और संहार के स्वरूप को दिखाता है। शिव को बेल पत्र और धतूरा चढ़ाने की परंपरा भी हरे रंग से जुड़ी है, क्योंकि बिल्व पत्र की हरियाली शीतलता और शांति का प्रतीक मानी जाती है। काशी के ज्योतिषाचार्य बलभद्र तिवारी बताते हैं कि हरा रंग माता पार्वती के साथ ही भोलेनाथ को भी प्रिय है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हरे रंग का कनेक्शन बुध ग्रह से जुड़ा है। हरे रंग के वस्त्र धारण करने से बुध प्रसन्न होते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में हरा रंग भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम का भी प्रतीक है। माता पार्वती, जिन्हें प्रकृति का स्वरूप माना जाता है, वह हरे रंग के वस्त्र और श्रृंगार में सजी-धजी शिव को प्रसन्न करती हैं। यही कारण है कि सावन में सुहागिनें हरे रंग के वस्त्र और श्रृंगार को अपनाकर माता पार्वती की भक्ति और अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

सावन में महिलाओं का हरे रंग को अपनाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विश्वास का हिस्सा है।

हरी चूड़ियां, साड़ी और मेहंदी न केवल सुहाग की निशानी हैं, बल्कि ये शिव-पार्वती के अटूट प्रेम को भी दिखाते हैं। हरे रंग की चूड़ियां सुहागिनों के लिए सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं, जबकि मेहंदी का गहरा हरा रंग प्रेम और भक्ति की गहराई को व्यक्त करता है।

सावन में हरियाली तीज और हरियाली अमावस्या जैसे पर्व भी हरे रंग की महिमा को बढ़ाते हैं और महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इन अवसरों पर महिलाएं हरे रंग के परिधान पहनकर झूले झूलती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करती हैं। यह परंपरा न केवल सौंदर्य को बढ़ाता है, बल्कि आत्मिक शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को भी पूरा करती है।
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