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SCO की ताकत: भारत से रूस तक आर्थिक और सैन्य शक्ति का आकलन!

आज दुनिया की 80% भूमि और 40% जनसंख्या को समेटे हुए है। इसकी ताकत सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सैन्य दृष्टि से भी जबरदस्त है।

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शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की स्थापना 1996 में ‘शंघाई फाइव’ के रूप में हुई थी, जिसमें चीन, रूस, कज़ाखस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान इसके मूल सदस्य थे। आज यह समूह लगभग एक दर्जन स्थायी सदस्यों और 12 से अधिक संवाद साझेदारों तक फैल चुका है। भारत, पाकिस्तान, ईरान और हाल ही में बेलारूस इसके सदस्य बन चुके हैं। एससीओ खुद को ‘बहुध्रुवीय विश्व’ का वाहक मानता है और पश्चिमी देशों के तथाकथित ‘रूल्स-बेस्ड ऑर्डर’ का विकल्प पेश करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय चीन में एससीओ बैठक में हिस्सा ले रहे हैं और आज (31 अगस्त) उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान शहर में हुई थी।

भारत:

भारत 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी पार कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। सर्विस सेक्टर इसका आधा जीडीपी संभालता है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग एक-तिहाई और कृषि करीब 10% हिस्सेदारी रखती है। भारत की तिमाही जीडीपी वृद्धि 7.8% रही, जो अनुमान से कहीं ज्यादा है। भारत के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है। 14.6 लाख सक्रिय सैनिक, 11.5 लाख रिजर्व और 25 लाख अर्धसैनिक बल। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 में भारत चौथे स्थान पर है। रक्षा बजट इस वर्ष 6.81 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो 9.5% की बढ़ोतरी है।

चीन:

चीन 19 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हालांकि, लगातार पांचवें महीने मैन्युफैक्चरिंग में गिरावट और बेरोजगारी जैसी चुनौतियाँ सामने हैं। चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना है—20 लाख सक्रिय सैनिक और करीब 11 लाख रिजर्व व अर्धसैनिक बल। उसका घोषित रक्षा बजट 249 अरब डॉलर है, लेकिन विश्लेषकों का दावा है कि असल खर्च कहीं ज्यादा है।

रूस:

रूस का जीडीपी 2.2 ट्रिलियन डॉलर है, लेकिन उसके पास दुनिया की दूसरी सबसे ताकतवर सेना है। 13.2 लाख सक्रिय सैनिक, 20 लाख रिजर्व और 2.5 लाख अर्धसैनिक बल उसकी सैन्य ताकत को मजबूत करते हैं। 2025 के लिए रूस ने 126 अरब डॉलर रक्षा बजट रखा है, जो उसकी जीडीपी का 6.5% है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सबसे काफी पीछे है, जीडीपी सिर्फ 410 अरब डॉलर। बार-बार IMF से मदद लेने के बावजूद उसने रक्षा पर 7.6–10 अरब डॉलर खर्च करने का बजट घोषित किया है। हालांकि यह देश इसकी आर्मी बूट के इशारों पर चलता है जिस कारण 6.6 लाख सक्रिय सैनिकों के साथ पाकिस्तान की सैन्य ताकत ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स में 12वें स्थान पर आती है।

  • ईरान की जीडीपी करीब 410 अरब डॉलर है। प्रतिबंधों और महंगाई से जूझते हुए भी वह 6.1 लाख सक्रिय सैनिकों और परमाणु मिसाइल कार्यक्रम पर खर्च जारी रखे हुए है।
  • कज़ाखस्तान की जीडीपी 261 अरब डॉलर और सैन्य बल 39,000 सक्रिय सैनिकों का है। किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान छोटे, गरीब लेकिन रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण देश हैं। ताजिकिस्तान की जीडीपी का एक-तिहाई हिस्सा रूस में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों की कमाई से आता है।
  • उज़्बेकिस्तान और बेलारूस भी एससीओ के हिस्से हैं। बेलारूस ने 2024 में 75.9 अरब डॉलर जीडीपी दर्ज की और 45,000 सक्रिय सैनिकों के साथ अपनी सैन्य ताकत बनाए रखी है।

एससीओ आज दुनिया की 80% भूमि और 40% जनसंख्या को समेटे हुए है। इसकी ताकत सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सैन्य दृष्टि से भी जबरदस्त है। भारत, चीन और रूस जैसे बड़े खिलाड़ी इसे वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम मंच बना रहे हैं।

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