चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार(1 सितंबर) को भारत की दृष्टि और नीति को रेखांकित करते हुए कहा कि यह तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है ‘एस-सिक्यूरिटी, सी- कनेक्टिविटी और ओ- ऑपर्च्युनिटी’। प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा, “मुझे एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेकर खुशी हो रही है। मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग को हमारे भव्य स्वागत के लिए धन्यवाद देता हूं। आज उज्बेकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस है, मैं उन्हें भी बधाई देता हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “भारत ने एससीओ के सदस्य के रूप में बहुत सकारात्मक भूमिका निभाई है। हमारी सोच और नीति तीन स्तंभों पर आधारित है सिक्यूरिटी, कनेक्टिविटी और ऑपर्च्युनिटी। पहला स्तंभ सुरक्षा है। शांति और स्थिरता किसी भी देश की प्रगति और विकास की बुनियाद हैं। लेकिन आतंकवाद और अलगाववाद जैसे बड़े खतरे इन लक्ष्यों को हासिल करने में सबसे बड़ी बाधा हैं। आतंकवाद न सिर्फ देशों की सुरक्षा के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती है।”
इस अवसर पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की और सदस्य देशों को संबोधित करते हुए संगठन की प्रगति और भविष्य की दिशा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एससीओ ने अब तक सहयोग और विकास में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं, जो संगठन की मजबूती को दर्शाती हैं। शिखर सम्मेलन से पहले पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर साझा की और लिखा, “तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में।”
गौरतलब है कि इस साल चीन SCO की मेजबानी कर रहा है। इसमें आठ सदस्य देश शामिल हैं और इसका मुख्य फोकस यूरेशियाई क्षेत्र में राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है।
यह यात्रा खास इसलिए भी है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी सात साल बाद चीन पहुंचे हैं। 2020 में लद्दाख सीमा विवाद के बाद भारत-चीन संबंध तनावपूर्ण बने रहे, ऐसे में इस सम्मेलन में मोदी की मौजूदगी दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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