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राइट्स इश्यू फंड के दुरुपयोग पर सेबी की सख्त कार्रवाई, कई कंपनियां जांच के दायरे में!

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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कंपनियों द्वारा राइट्स इश्यू के जरिए जुटाए गए फंड्स के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया है। व्हिसलब्लोअर्स की शिकायतों के आधार पर नियामक संस्था ने कई कंपनियों पर जांच शुरू की है, जहां प्रमोटरों पर आरोप है कि उन्होंने निवेशकों के पैसे को निर्धारित उद्देश्यों के बजाय निजी इस्तेमाल के लिए डायवर्ट कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, सेबी फिलहाल चार से पांच कंपनियों की गतिविधियों की जांच कर रहा है और एक पैटर्न सामने आया है, जिसमें छोटी और निष्क्रिय कंपनियां राइट्स इश्यू के जरिए धन जुटाकर उसे निजी संपत्ति खरीदने या रिश्तेदारों को ट्रांसफर करने में इस्तेमाल कर रही हैं।

राइट्स इश्यू, जिसमें मौजूदा शेयरधारकों को रियायती दरों पर शेयर दिए जाते हैं, आमतौर पर कंपनियों के विस्तार और व्यवसायिक विकास के लिए फंड जुटाने का जरिया होते हैं। हालांकि, कुछ कंपनियां इन फंड्स का गबन कर रही हैं, जिससे निवेशकों को नुकसान पहुंच रहा है।

5 दिसंबर 2024 को पारित एक आदेश में, सेबी ने मिष्टान फूड्स लिमिटेड को राइट्स इश्यू से जुटाई गई 49.82 करोड़ रुपये की राशि और फर्जी लेनदेन के माध्यम से डायवर्ट किए गए 47.10 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया। कंपनी ने 150 करोड़ रुपये के बड़े राइट्स इश्यू को रद्द कर, छोटे राइट्स इश्यू जारी किए, ताकि सेबी की निगरानी से बचा जा सके।

इसके अलावा, 11 दिसंबर 2024 को जारी एक अन्य आदेश में, सेबी ने डेबॉक इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर सख्त कार्रवाई की। जांच में कंपनी को वित्तीय अनियमितताओं, बैंकिंग दस्तावेजों में हेरफेर और राइट्स इश्यू से जुटाई गई राशि के गबन का दोषी पाया गया। इस कारण, सेबी ने डेबॉक इंडस्ट्रीज को पूंजी बाजार में किसी भी तरह का कारोबार करने से रोक दिया है। राइट्स इश्यू से फंड डायवर्जन के मामलों का पता लगाना मुश्किल होता है, क्योंकि इसका शेयर बाजार पर तात्कालिक असर नहीं पड़ता। ऐसे में, व्हिसलब्लोअर्स की भूमिका अहम हो जाती है।

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गवर्नेंस सुधार के लिए सेबी ने कंपनियों को अपने फंड प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत, एक नई ऑडिट कमेटी बनाने का आदेश दिया गया है, ताकि निवेशकों के हित सुरक्षित रह सकें और राइट्स इश्यू से जुटाई गई राशि का सही उपयोग हो। नियामक की इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि अब ऐसी कंपनियों पर सख्ती बढ़ाई जाएगी, जो निवेशकों के पैसे का दुरुपयोग कर बाजार की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही हैं।

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