अमेरिका के वर्जीनिया राज्य के नॉरफ़ॉक स्थित ओल्ड डोमिनियन यूनिवर्सिटी में गुरुवार (12 मार्च) को हुई गोलीबारी की घटना में संदिग्ध हमलावर की पहचान 36 वर्षीय मोहम्मद जल्लोह के रूप में हुई है। जल्लोह पूर्व में आर्मी नेशनल गार्ड का सदस्य रह चुका था और वर्ष 2016 में ISIS को समर्थन देने के आरोप में दोषी भी ठहराया गया था।
मीडिया से बातचीत के दौरान एफबीआई की स्पेशल एजेंट डोमिनिक इवांस ने बताया कि जल्लोह विश्वविद्यालय के रिजर्व ऑफिसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स (ROTC) के एक कक्षा कक्ष में घुसा और “अल्लाहु अकबर” का नारा लगाते हुए गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में ROTC प्रशिक्षक लेफ्टिनेंट कर्नल ब्रैंडन शाह की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए।
एफबीआई के अनुसार, जल्लोह ने कक्षा में घुसने के बाद वहां मौजूद एक व्यक्ति से पूछा कि क्या यह ROTC की कक्षा है। सकारात्मक जवाब मिलने के बाद उसने अचानक गोली चलाना शुरू कर दिया। हालांकि कक्षा में मौजूद कुछ छात्रों ने बहादुरी दिखाते हुए हमलावर को काबू में कर लिया और उसे मार गिराया। जब तक सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं, तब तक जल्लोह की मौत हो चुकी थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, जल्लोह मूल रूप से सिएरा लियोन का रहने वाला था और बाद में वह अमेरिकी नागरिक बन गया था। वर्ष 2017 में उसे ISIS को ‘मैटेरियल सपोर्ट’ देने के मामले में 11 साल की सजा सुनाई गई थी। जांच में सामने आया था कि 2016 में अफ्रीका की छह महीने की यात्रा के दौरान उसने ISIS के सदस्यों से मुलाकात की थी।
जल्लोह ने अदालत में स्वीकार किया था कि वह एक ISIS सदस्य से मिला था, जिसने उसे अमेरिका में एक व्यक्ति से मिलवाया। बाद में पता चला कि वह व्यक्ति एफबीआई का मुखबिर था। जल्लोह ने उस मुखबिर से कहा था कि वह 2009 में टेक्सास के फोर्ट हूड में हुई सामूहिक गोलीबारी से प्रेरित होकर एक आतंकी हमला करना चाहता है। उस हमले में एक अमेरिकी सेना के मेजर ने “अल्लाहु अकबर” का नारा लगाते हुए 13 लोगों की हत्या कर दी थी और 32 अन्य को घायल कर दिया था।
'ACT OF TERRORISM': FBI Special agent Dominique Evans on the shooting at Old Dominion University:
“I can tell you that we have confirmed reports that prior to him conducting this act of terrorism, he stated Allahu Akbar and he was formally a subject of a FBI investigation in… pic.twitter.com/lH9Q93wT1C
— Fox News (@FoxNews) March 12, 2026
जल्लोह ने यह भी कहा था कि वह रमज़ान के महीने में ऐसा हमला करने की योजना बनाना चाहता था। हालांकि उसे 11 साल की सजा पूरी होने से पहले ही दिसंबर 2024 में जेल से रिहा कर दिया गया था।
इस घटना के बाद अमेरिकी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने मामले को आतंकवादी हमले के रूप में जांचने की घोषणा की है। एफबीआई के निदेशक काश पटेल ने बयान जारी कर कहा कि एजेंसी इस गोलीबारी को “आतंकवादी का कृत्य मानकर जांच कर रही है और FBI की जॉइंट टेररिज्म टास्क फोर्स स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर पूरे मामले की जांच करेगी।
यह भी पढ़ें:
“जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो हम बहुत पैसा कमाते हैं”, डोनाल्ड ट्रंप का बयान
30 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत पहुंचे दो बड़े जहाज
47 करोड़ की अवैध सिंथेटिक ड्रग और 3.5 टन रसायन जब्त, दो गिरफ्तार



