पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए छह और भारतीय-ध्वज वाले एलपीजी टैंकर तैयार हैं और ईरान द्वारा इन जहाजों से किसी प्रकार का ‘टोल’ नहीं लिया जा रहा है। मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने मंगलवार(24 मार्च) को बताया कि सभी छह टैंकर मार्ग के लिए तैयार हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत यह मार्ग खुला हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान भारत-ध्वज वाले जहाजों से कोई शुल्क नहीं ले रहा है।
इस बीच, दो एलपीजी टैंकर ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ सोमवार (23 मार्च) को सफलतापूर्वक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। ये दोनों जहाज करीब 92,000 टन एलपीजी लेकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। संवेदनशील क्षेत्र से गुजरते समय इन जहाजों को भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की सुरक्षा प्रदान की गई।
ये टैंकर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों BPCL और HPCL द्वारा चार्टर किए गए हैं और इनके 26 से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है। इससे पहले ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नामक जहाज भी सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं, जो लगभग 92,700 टन एलपीजी लेकर आए थे।
गौरतलब है कि ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होने वाले वैश्विक ऊर्जा परिवहन पर गंभीर असर पड़ा है। भारत अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरतों का आयात करता है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। मौजूदा हालात में करीब 3 लाख टन एलपीजी और अन्य कार्गो फंसा हुआ बताया जा रहा है।
इसके अलावा, लगभग 20 जहाजों में सवार 540 से अधिक भारतीय नाविक भी इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। सरकार उनकी सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है और खाड़ी देशों के सहयोग से कुछ नाविकों को स्वदेश वापस लाने की प्रक्रिया भी जारी है।
सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के स्तर पर हुई कूटनीतिक बातचीत के चलते कुछ भारतीय जहाजों के सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित किया गया है। क्षेत्र में भारतीय नौसेना के युद्धपोत तैनात हैं, जो जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।
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