जब क्रिप्टोकरेंसी की शुरुआत हुई थी, तब समर्थकों ने इसे “नई डिजिटल गोल्ड” के रूप में प्रचारित किया था। एक ऐसी वैकल्पिक मुद्रा जो सरकारी नियंत्रण से मुक्त होगी। लेकिन हालिया बाजार उथल-पुथल ने इस दावे की असलियत सामने ला दी है। मार्च से अप्रैल के बीच जब वैश्विक बाजार अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी निर्यात शुल्कों के कारण डगमगा रहे थे, तब सोना 15% बढ़ा, जबकि बिटकॉइन 1% गिर गया। इसने साबित कर दिया कि संकट के समय निवेशकों का असली भरोसा अब भी भौतिक सोने पर ही है, न कि डिजिटल टोकनों पर।
मार्च की शुरुआत से मध्य अप्रैल तक जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने वैश्विक बाजारों में गिरावट पैदा की, तब सोना निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गया। इस अवधि में सोने की कीमतों में 15% की तेज़ वृद्धि दर्ज की गई। इसके विपरीत, बिटकॉइन 1% गिरा। यह अंतर दर्शाता है कि जब बाजार में डर होता है, तो क्रिप्टोकरेंसी अपनी सुरक्षा भूमिका निभाने में असफल रहती है।
हालांकि बिटकॉइन की कीमत इस साल अब तक 13% बढ़ी है, पर यह वृद्धि सोने की तुलना में फीकी है। सोना, जो सदियों से मुद्रास्फीति और आर्थिक अस्थिरता के खिलाफ हेज (सुरक्षा कवच) माना जाता है, इस साल अब तक 44% तक ऊपर गया है। भले ही हाल में इसमें कुछ करेक्शन देखा गया हो।
इस विरोधाभास के पीछे दो बुनियादी कारण हैं। सोना एक भौतिक संपत्ति है। इसका अस्तित्व किसी सर्वर या नेटवर्क पर निर्भर नहीं है। संकट की स्थिति में भी इसकी कीमत रहती है और इसे कहीं भी बदला जा सकता है। इसके उलट, बिटकॉइन एक डिजिटल संपत्ति है। इसे रखने और इस्तेमाल करने के लिए इंटरनेट और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है। आर्थिक संकट या साइबर हमले की स्थिति में यह संभव नहीं कि आपका ब्रोकर या एक्सचेंज आपको समय पर बिटकॉइन रिडीम करवा सके। इसलिए यह असल मायनों में सुरक्षित निवेश नहीं बन पाता।
बिटकॉइन की कुल आपूर्ति भले ही सीमित है, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी की कुल संख्या नहीं। हर कुछ महीनों में एक नई डिजिटल करेंसी लॉन्च हो जाती है। आज बिटकॉइन सबसे लोकप्रिय है, पर अगर भविष्य में कोई नई और बेहतर क्रिप्टो उभरती है, तो निवेशक बिटकॉइन से पल भर में पलायन कर सकते हैं। यही अस्थिरता इसे “गोल्ड-जैसा स्थायित्व” नहीं बनने देती।
इस साल का बाजार उतार-चढ़ाव इस बात का सटीक उदाहरण है कि क्रिप्टो अभी तक ‘गोल्ड’ का विकल्प नहीं बन पाया है। बिटकॉइन एक आकर्षक निवेश साधन जरूर है, लेकिन यह मुद्रास्फीति या वैश्विक संकट के समय सुरक्षित शरणस्थल नहीं है।
दूसरी ओर, सोना सदियों पुराना, सीमित और सार्वभौमिक रूप से स्वीकार्य अब भी वही करता है जिसके लिए निवेशक उस पर भरोसा करते हैं: मुश्किल समय में स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करना।
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