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“शेख हसीना को अपराधी क्यों, मोहम्मद यूनुस को क्यों नहीं?”

तस्लीमा नसरीन का सवाल

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बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) द्वारा बर्खास्त प्रधानमंत्री शेख हसीना को दिए गए मृत्युदंड पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले वर्ष हुए छात्र आंदोलन के दौरान कथित दमन के लिए हसीना को अपराधी माना जा रहा है, लेकिन उसी आंदोलन के समय सत्ता संभालने वाले मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और उनके जिहादी बलों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

सोमवार(18 नवंबर) को बांग्लादेश के ICT ने अपने ऐतिहासिक फैसले में 78 वर्षीय शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध, कई लोगों की हत्या, हिंसा को बढ़ावा देने और पिछले वर्ष के छात्र विद्रोह को रोकने में विफल रहने का दोषी ठहराया। इस फैसले के बाद से बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में भारी उथल-पुथल मच गई है।

भारत में 1994 से निर्वासन में रह रहीं 63 वर्षीय तस्लीमा नसरीन ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जिन कार्रवाइयों के लिए हसीना को अन्यायपूर्ण कहकर दोषी ठहराया गया, वही कदम जब यूनुस और उनके समर्थक उठाते हैं, तो उन्हें  न्यायसंगत कहा जाता है। उन्होंने लिखा, “हसीना को अपराधी घोषित करने वाले यूनुस और उनके जिहादी बल खुद वही अपराध करते हैं, लेकिन उसे वैध ठहराते हैं। यह न्याय का ढोंग कब खत्म होगा?”

नसरीन ने यह भी पूछा कि यदि सरकार विध्वंसात्मक कृत्यों पर गोली चलाने का आदेश देती है, तो खुद को अपराधी नहीं कहती, लेकिन हसीना को क्यों दोषी ठहराया गया जबकि जुलाई 2023 में उन्होंने ऐसे ही हालात में गोली चलाने का आदेश दिया था। छात्र आंदोलन के बाद पिछले वर्ष 8 अगस्त 2024 को मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम प्रशासन के मुख्य सलाहकार का पद संभाला। तस्लीमा नसरीन लंबे समय से उनके शासन को मानवता के खिलाफ अपराध करार दे रही हैं। वे यूनुस का नोबेल शांति पुरस्कार वापस लेने और उन्हें आजन्म कारावास देने की मांग कर चुकी हैं।

यूनुस को 2006 में माइक्रोक्रेडिट और माइक्रोफाइनेंस मॉडल के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था, जिसने ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन हसीना सरकार के पतन के बाद से यूनुस और उनकी टीम पर छात्रों पर हिंसा करवाने के आरोप लगातार उठ रहे हैं।

ICT ने शेख हसीना के साथ पूर्व गृह मंत्री असदुज़्ज़मान खान को भी मौत की सजा सुनाई है। वहीं, पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को राज्य गवाह बनने और दोष स्वीकार करने पर पांच साल की सजा मिली है। यह फैसला आगामी फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले आया है, जिसमें आवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला देश में नई अशांति और राजनीतिक ध्रुवीकरण को जन्म दे सकता है।

दिल्ली में निर्वासन में रह रहीं शेख हसीना ने इसे “पक्षपाती, राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित और गैर-लोकतांत्रिक न्यायाधिकरण द्वारा दिया गया फैसला” बताया है। दूसरी ओर, यूनुस ने कहा कि कानून के सामने कोई भी शक्तिशाली व्यक्ति भी असुरक्षित नहीं है। शेख हसीना की सजा, यूनुस की आलोचना और तस्लीमा नसरीन के तीखे सवालों ने बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल को और बढ़ा दिया है। यह विवाद न केवल सत्ता संघर्ष को उजागर करता है, बल्कि यह भी कि न्याय और जवाबदेही के मानक किस तरह से राजनीतिक हितों के आधार पर बदलते दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले हफ्ते बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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